October 30, 2020
  • October 30, 2020

Atma gyan kashe paye

By on February 21, 2019 0

Atma gyan kashe paye

atma gyan

पाने योग्य सिर्फ Atma gyan है , लेकिन अभ्यास वैराग्य के बगैर संभव ही नहीं ! becouse  हम संसार की चीजों को पाने के लिए अपना कीमती समय लगा देते है and छूटने वाली वश्तु और रिश्ते को सवारने में ही लगे रहते है।

than जब कोई इंसान इस दुनिया से मरता है तो उसके कपड़े, उसका बिस्तर, उसके द्वारा इस्तेमाल किया हुआ सभी सामान उसी के साथ तुरन्त घर से निकाल दिये जाते है, and  छीनने वाली यानि सोना चाँदी को छीन लेते है।

लेकिन becouse साधना कर Atma gyan की जरा भी झलक पा ले, पुण्य लाभ प्राप्त कर लें तो कोई छीन नहीं सकता।

Atma gyan kashe paye

कोई उसके द्वारा कमाया गया धन-दौलत, उसका घर, उसका पैसा, प्रौपर्टी ,उसके जवाहरात आदि, इन सबको क्यों नही छोड़ते?

बल्कि उन चीजों को तो ढूंढते है, मरे हुए के हाथ, पैर, गले से खोज-खोजकर, खींच-खींचकर निकालकर चुपके से जेब मे डाल लेते है,

वसीयत की तो मरने वाले से ज्यादा चिंता करते है।

इससे पता चलता है कि आखिर रिश्ता किन चीजों से था।

khechri Mudra ईसे भी पढें https://mantragyan.com/kriya-yog/khechri-mudra-kya-ha-khechri-mudra-abhyash-kase-kare-khechri-mudra-se-labh/

इसलिए पुण्य की कमाई करो, अपने शक्ति यानी केंद्र को जगावो , और  न छीना जाने वाला सुख पा लो। इसे कोई ले नही सकता, चुरा नही सकता। ये कमाई तो ऐसी है, जो जाने वाले के साथ ही जाती है।

Abhyash Or varagy से तू Aatma को ग्रहण कर सकता है, पा सकता है, अनुभव कर सकता है।

Abhyash क्या है :-

मन को बारम्बार ध्येय में लगाने का नाम अभ्यास है।

उसमें महत्त्व और आदरबुद्धि होनी चाहिए। ऐसा करने से Abhyash दृढ़ हो जाता है।

Abhyash के दो भेद हैं:-

1. सारे चिन्तनों की उपेक्षा करते हुए, उनसे उदासीन होकर अपनी मनोवृत्ति को केवल लक्ष्य की ओर ही लगाएँ।

2. याने Dhyan करें मन जहाँ-जहाँ भी विचरण करे वहाँ सर्वत्र अपने इष्ट की सत्ता को व्याप्त देखें।

Focus Ward :-

Abhyash की सहायता के लिए Varagy की आवश्यकता है , but सांसारिक आकर्षणों से जितनी अधिक विरक्ति होगी मन उतना ही परमात्मा की ओर आकर्षित होगा।

इस तरह Abhyash Or varagy से मन वशीभूत हो जाता है। and आत्म विश्रांति, Atma gyan प्राप्त होता है।

atma gyan kashe paye.

How to get self-knowledge, practice solitude

Only spiritual knowledge is available, but not possible without practice and quietness.

But we put our precious time to get the things of the world, and we continue to ride away the Vishu and the relationship that is leaving.

When a person dies from this world, his clothes, his bed, all the things used by him are immediately removed from the house, and the person who snatches i.e. the gold snatch the silver.

Atma gyan kashe paye

Nobody earned his wealth Property, his house, his money, his jewels etc., why not leave all of them?

Rather find those things, seek out the dead, hands, feet, throat, and pull them out and put them in a pocket secretly; If the will is more than the one who dies, then they worry.

This shows that the relation with which things was.
Therefore, earn virtue, get your strength ie the center and do not get lost in happiness. No one can take it, can not steal it. These earnings are such, which goes with the one who goes.

 

“Through practice and quietness, you can assume the soul, find it, experience it, it is the practice of applying the mind to the goal of time, it should be important and respectful.

 

There are two differences in practice: –

1. Neglecting all the meditations, disheartening them and only focusing their mentality towards the goal.

2. Keep in mind that wherever the mind goes, wherever the mind is, the power of your favors everywhere is wide.

Main suggestions: –

Quietness is needed to help practice, because the more embarrassment the worldly attraction attracts towards the same divine.

In this way the mind becomes subjugated by practice and quietness. And self-rest, self-knowledge is attained.

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