October 30, 2020
  • October 30, 2020

उपवास का अर्थ और विधि

By on January 8, 2019 0

उपवास का अर्थ और विधि

उपवास :-

उप +वास , यानि आत्मा के समीप निवास करने की विधी को उपवास का अर्थ और विधि कहते हैं।

कुछ लोग उपवास का अपने मन से ही अर्थ समझ लिया है कि चावल भोजन न खाये भले ही भारी भोजन जैसे डालडा घीं से बना आलु खा कर रहें। कुछ साधक ने उपवास का अर्थ और विधि का सवाल करा था , मुझे लगा कि उनको जवाब देना चहिए,

उपवास कैसे करे ?

पंच इंद्रियों को वश में करने की विधी करे, जैसे कम भोजन, कम देखना, कम बोलना, कम सुनना या आत्म ज्ञान की प्राप्ति की ही सत्संग सुने, और स्पर्श की रस में उपवास करना। क्योंकि मुह से खाने को ही भोजन नहीं कहते बल्कि पंच इंद्रियों से भोगा गया सभी भोजन है।

उपवास के दिनों में मानसिक गुरू मंत्र जप सदा करते रहें ताकि आत्मा में विश्राम कर सको।

साधक की आप बीती :-

उन्होंने मुझे कहा ” मैं गंगा जी गया था 108 दीपक जला के आये है गंगा जी मे, मेरा कोई काम नही बना ”

” तो आपने गंगा जी पर एहसान कर दिया। आपको गंगा जी 108 दीपक जलाने के लिए बोली थी ?? कब आयी थी?? कब बात करी ??

उन्होंने बोला ” कि मैने जलाए है मैं मंदिर जाता हूँ” , तो आप ! मंदिर जा कर एहसान कर दिया अपने, मंदिर गए क्या दिया ??

साधक बोले ” कलाकन्द चढ़ाया था और हनुमान जी के मंदिर भी गया था फिर सवा एक मन लड्डू चढ़ा दिए हनुमान जी पर।

भाई आप समझने का प्रयास कीजिये, वास्तव में ऐसा नही होता है जैसा आप व्रत उपवास को समझते है सुनते समझते हो । अगर कोई भुखा है तो उपवास नहीं हुआ अपनी भावनाओं पर निर्भर है की हम क्या मानते हैं।

उपवास का संहीं अर्थ और विधि समझीये वास्तव में भावना मुख्य है। मै बताने का प्रयास कर रहा हुँ, भुखा मरी तो बहुत से गरीब भी करते है जिनके पास गरीबी है, भोजन नही होता, कुछ ऐसे जनावर होते है चार पैर का, रोटी ही नही मिलता उन्हें तो क्या वो उपवास हो गया ? नही ना, उपवास का अर्थ होता है उप + वास, “वास means जैसे अटल आवास, प्रधानमंत्री आवास, आवास means रहने की वो जगह, “उप” माने समीप, किसके समीप, आत्मा के समीप रहने वाली, “वास” का मतलब निवास करना, “उप” यानी समीप,आत्मा के समीप “वास” करने को कहते है “उपवास”।

अब तो आप भ्रमित नही होंगे ? की हमने खाना छोडा तो भगवान के घर अंन्न बढा, भगवान ना खाता है न भुखा है सभी कार्य उसी की सत्ता से होता है। खुदा अच्छा करता है ना बुरा करता है परमात्मा, ठीक वैसे ही जैसे तलवार से चाहो अच्छा करो या बुरा करो, परमात्मा कभी अच्छा या बुरा दोनो नही करता, यदि अच्छा करता है तो भी भोगता हो जयेगा, बुरा करता है तो भी भोगता हो जयेगा । खुदा ना अच्छा करता है ना बुरा करता है, ना नियंता है

जैसे :-

सूर्य कुछ कर रहा है क्या, आप चाहो तो उसमें सौर प्लेट लगा कर मछली भून जाओ, चाहो तो उसी से भोजन भून जाओ, यानि चने भून लो, सूर्य कुछ करता है क्या ?

अच्छा और बुरा करने वाला कौन है?

जीव ही कर्ता पनें से कर्म करता है और कर्म बंधन में फसं जाता है । जो अच्छा करेगा अच्छा भोगेगा बुरा करेगा बुरा भोगेगा, परमात्मा तो एक सत्ता है, दृष्टा है, साक्षी है, आनंद स्वरूप है चाहो तो आनंद उठाओ चाहो तो बुरा मानो, मर्ज़ी है आपकी, तो वास्तव में परमात्मा ना अच्छा करता है ना बुरा करता है जो कुछ करता है जीव करता है एक ही चीज़ों में अच्छा मान लेता है, एक ही चीज़ों में बुरा मान लेता है, परमात्मा साक्षी है, आनंद स्वरूप है, इसलिए परमानंद कहते है ।।

उपवास करे, फलाहार करे, कम भोजन खाये, उपवास का सहीं अर्थ और विधि आप समझो, अभी मैने अर्थ बताया है ना, कम भोजन करे, कम देखे, कम सुने, लोगों ने खाने को कम कर दिया लेकिन दूसरे तरीके से फुल पेट खाया , सिंघाड़े का पूरी और फलाहार नमक वाला भोजन, उपवास का सही अर्थ समझें, कम खाये, कम देखे, कम सुने, उपवास का संहीं अर्थ और विधि समझें और प्रमात्मा के रास्ते चल कर ज्ञान प्राप्त करें और आनंद पायें। साधना शिविर में शामिल होने के लिए संपर्क करें

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