October 23, 2020
  • October 23, 2020

Dhyan Lagane ki Saral vidhi

By on April 7, 2019 0

Dhyan Lagane ki Saral vidhi

dhyan

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ईस लेख में Dhyan Lagane ki Saral vidhi के बारे में जानकारी लीखा गया है, यदि आप बताये नियमों का पालन करते हैं तो अध्यात्मिक ऊंचाई पाने से कोई नहीं रोक सकता। Dhyan Lagane ki Saral vidhi लेख आपके ध्यान की गहराई में उतरने के लीये श्रेष्ठ विधि हो सकती है, आपको सिर्फ और सिर्फ श्रद्धा और विश्वास करना है।

Simple method of meditation

Dhyan Manshik puja

पूजा साकार और निराकार दोनों ही की की जा सकती है, और साधना में Dhyan सबसे आवश्यक और महत्त्वपूर्ण साधन है। श्री गीता जी में Dhyan की बड़ा महिमा गायी है।जहां – कहीं उनका उच्चतम उपदेश है, वहीं उन्होने मन को स्वयं में याने भगवान मे प्रवेश करने के लिए अर्जुन के प्रति आज्ञा की है। योग शास्त्र में Dhyan का स्थान बहुत ऊँचा है, ध्यान प्रकार बहुत – से हैं, साधक को अपनी रुचि, भावना और अधिकार के अनुसार और अभ्यास की सुगमता देखकर किसी भी एक स्वरूप का Dhyan करना चाहिये।

सभी काम पूरा कराने वाली केवली कुंभक विधि भी पढें https://mantragyan.com/kriya-yog/sabhi-manokamna-pura-kevli-kumbhak-vidhi/

Dhyan Lagane ki Saral vidhi

यह याद रखना चाहिए कि निर्गुण – निराकार और सगुण – साकार भगवान एक , वास्तव में एक हैं। एक ही परमात्मा के कई दिव्य प्रकाशमय स्वरूप हैं। हम इनमे से किसी भी एक स्वरूप का आश्रय ले कर परमात्मा को पा सकते हैं; क्योंकि वास्तव में Dhyan और मानसिक पूजा परमात्मा से अभिन्न हैं। भगवान के परम भाव को समझकर किसी भी प्रकार से उनका Dhyan किया जा रहा है, अंत मे प्राप्ती एक ही भगवान की होगी ।

Dhyan Lagane ki Saral vidhi

जो सर्वथा अचिन्ति शक्ति, अचिन्त्य गुण संपन, अनन्तदयामय, अनन्त महिम, सर्वव्यापी, सृष्टिकर्ता, सर्वज्ञ, सर्वप्रिय, सर्वेश्वर, सर्वज्ञ, सर्वसूहर , अज, अविनाशी, गुणातीत, रुपातीत, अचिष्ठ्य और स्वमहिमा में ही प्रतिष्ठित, एकमात्र परम और चरम सत्य हैं। अतएव साधक को इधर – उधर मन न भटका कर अपने इष्टरूप महानता – बुद्धिमान पर परम भाव से Dhyan अभ्यास करना चाहिए ।

Easy meditation method

श्रीमद् भगवद्गीता के छठे अध्याय के ग्यारहवें से तेरहवें श्लोक तक के वर्णन के अनुसार एकांत, dhyan और मानसिक पूजा पवित्र और सात्विक स्थान में सिधे भौतिक पद्मसन या अन्य कोई सुख – साध्य आसन से बैठकर नींद का डर न हो तो आँखें मूंदकर, नहीं तो आँखों को भगवान की मूर्ति पर लगा कर या, आँखों की दृष्टि को नासिका के अग्रभाग पर जमा कर प्रतिदिन कम से कम तीन घंटे, दो घंटे या एक घंटा – जीतना भी समय मिले – सावधानी के साथ लय, कषाय रस्सवाद, आलस्य, दम्भ आदि दोषों से बचकर श्रद्धा भक्तिपूर्वक तत्परता के साथ। Dhyan अभ्यास करना चाहिए।

सावधानियां :-

1. Dhyan के समय शरीर, मस्तक और गला सीधा रहे और रीढ़ की हड्डी भी सीधी रहनी चाहिये।2. Dhyan का समय और स्थान भी सुनिश्चित होना चाहिए।3. ऊपर लिखे गए अनुसार एकान्त आसन पर बैठकर साधक को दृढ़ निश्चय के साथ नीचे लिखी धारणा करनी चाहिये !

Dhyana

Dhyana

निर्गुण – निराकार का ध्यान

एक सत्य, सनातन, असीम, अनन्त विज्ञानानन्दघन ,पूर्णब्रह्म परमात्मा ही परिपूर्ण हैं। उनके सिवा न तो कुछ है, न हुआ है। और नहीं होगा। उन परब्रह्मा का ज्ञान भी उन परब्रह्म को है; क्योंकि वे ज्ञान स्वरूप ही हैं। उनके अतिरिक्त और जो कुछ भी प्रतीत होता है, सब कल्पना मात्र है। सब कुछ वे ही वे हैं।इसके अनन्तर चित्त मे जो वस्तु के लिए स्फुरण हो, उसको कल्पना समझ कर उसका त्याग (अभाव) कर दे। एक परमात्मा के सिवा और किसी की भी सत्ता नहीं रहने दे। ऐसा निश्चय करे कि जो कुछ प्रतीत होता है, वह है नहीं।

Dhyan Lagane ki Saral vidhi

मन, बुद्धि आदि कुछ भी नहीं है। यों अभाव करते – करते सबका अभाव हो जाने पर अन्त में सबका अभाव करने वाली एक बुद्धि की शुद्ध वृत्ति रहती है। लेकिन अभ्यास की दृढ़ता से दृश्य प्रपंच का सुनिश्चित अभाव होने पर आगे चलकर वह भी -अपने आप ही शान्ता हो जाता है। उस बुद्धिको शुद्ध वृत्तिका त्याग करना नहीं पड़ता, स्वयं – आप ही हो जाता है। यहाँ त्याग, त्यागी और त्याग्य की कल्पना सर्वथा नहीं रह जाती, इसीलिए वृत्ति का त्याग किया नहीं जाता, वह वैसे ही हो जाता है, जैसे ईंधन के अभाव में आग का। इसके अनन्तर जो कुछ बचा रहता है, वही विज्ञानन्द घद परमात्मा है। वह असीम, अनन्त, नित्य बोधस्वरूप , सत्य और कैवल्य है।

Dhyan Lagane ki Saral vidhi

वही ‘सत्यं ज्ञानमनन्तं ब्रह्म’ है।

परिपूर्ण ज्ञानन्दय है, लेकिन वह आनन्द स्वरूप बुद्धिग्य नहीं है, अचिन्ति है – केवल अचिन्त्य है।इस प्रकार विचारशील दृश्य प्रपंच का पूर्णतया अभाव कर अभाव करने वाली वृत्ति की भी ब्रह्मांड लीन कर देना चाहिये।अगला भाग अगामीआत्म ज्ञान, योग, भक्ति की साधना के जानकारी लिये यूटूब चैनल पर अवश्य जायें।

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Focus word :-

Dhyan Lagane ki Saral vidhi लेख में दी गई जानकारी का अनुसरण करें और प्रमात्मा प्राप्ति की ओर चले। मैं परमात्मा से प्रार्थना करता हूँ आप का मन साधना और अभ्यास में स्वतः ही लगा रहे। यदि आप हमारे योग ,ध्यान , गुप्त क्रीया योग की एडवांश साधना शिविर में शामिल होना चाहतें हैं तो संपर्क करें। Dhyan Lagane ki Saral vidhi लेख साधको में शेयर करे और पुन्य लाभ जरूर कमायें।

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