October 30, 2020
  • October 30, 2020

Dhyan Nhi Lagta To

By on January 23, 2019 0

Dhyan Nhi Lagta To

ईस लेख में हम चर्चा करने वाले है ध्यान किसे कहते है ? और जैसा अपने टाइटल में देखा है Dhyan Nhi Lagta To क्या करें ?

ध्यान का ऐसा कौंन सा “ब्रह्मास्त्र” है जिसका उपयोग करो और ध्यान लगने लगे जाए। काफी लोंगो का सवाल होता है “की Dhyan Nhi Lagta To, हम क्या करें ?

एक माई ने तो हद ही कर दी मैं :-

मेरे पास उसने कॉल करी और उसने बताया “गुरु जी मैं एक मंत्र जाप करती हूं पांच साल से, बिल्कुल ध्यान नही लगता ।

👉मैं बोला “पांच साल से करती हो तो , कौन सा मंत्र जाप करती हो ?

👉बोली “गणेश जी का”

👉अच्छा जी और कुछ करती हैं?

👉उन्होंने बताया दुर्गा जी का भी मंत्र जाप करती हूं और निर्वाण मंत्र भी करती हूं ।

👉मैं बोला “फिर” ।

👉बोली ” एक यूट्यूब वाले ने बहुत बढ़िया मंत्र बताया उसका भी करती हूं”।

👉”ठीक है शनि जी का भी करती हो ??

👉बोली “नहीं नहीं करती हूं ।

👉”क्यो नही करती हो ”

👉बोली “में तो बहुत सारा करती हूं”

👉”अच्छा कौन-कौन सा”

👉गिनती की उन्होंने फ़ोन पे और बताई ७-८ मंत्र करती हैं।

👉में बोला ” शनि जी का नही करती” ?

👉बोली “नहीं”

👉” शायद शनि नाराज़ हो तो”

👉बोली ” हाँ, गुरु जी ऐसा हो सकता है”

👉अरे हद हो गयी माई कोई किसी के कहने से नाराज होगा, किसी के कहने से प्रसन्न होगा। हमारा कर्म कहाँ गया” ?

👉माई जी चुप हो गयी ।

👉मै बोला “सबसे पहले ये बताओ ध्यान किसे कहते है”?

👉बोली ” मन शांत नही रहता बहुत झगड़ा होता है”
उनका कहना था बहुत झगड़ा होता है
“कहाँ”

👉बोली “मन में”

👉अच्छा विचार शांत नही रहता है ।

👉बोली “कुछ बता दो गुरु जी, मेरा ध्यान नही लगता आप बोलते है अपने ७ दिन में ऐसा वीडियो डाला, जिसमे ७ दिन में ७ चक्र जागृत हो जाये, मैंने वो भी वीडियो देखा है ७ दिन में आप कुंडलिनी जागृत बताते हों ।

मुझे तो यहां ७ साल हो गए ।

👉सात साल नहीं ७ जन्म भी हो सकते है । जब तक इच्छा है ध्यान नहीं लगेगा, इच्छा का शांत होना ही ध्यान है।

संकल्प साधना ईसे भी पढें https://mantragyan.com/sankalp-sadhna-vidhi-2/

ध्यान किसे कहते है ?

सबको समझ मे ध्यान नहीं आता है । ध्यान का व्यहवाहरिक अर्थ में समझे तो ।

जैसे:-

हम अपने बच्चे को बोलते है ध्यान से स्कूल जाना बेटा मतलब अपने लक्ष्य को याद रखना, अब हमारा लक्ष्य क्या होगा ? व्यहवारिक जगत में तो कुछ भी लक्ष्य बना लेते है हम जैसे:- दिल्ली जाना है, स्कूल जाना है, ध्यान लगाकर पढ़ना है , मतलब आंखें बंद करके तो पढ़ना नही हुआ ना ?

हमे अपना फोकस लक्ष्य पर रखना है इसे हम ध्यान कहेंगे । आध्यात्मिक जगत में मन मे झडगे ना हो ।

जैसे:- उस माई ने बताई काफी झगड़ा होता है तो आप समझे मन शांत हो। ना कि उसके इतने सारे मंत्र करने से कुछ बात होगी ।

सावधानी :-

एक मंत्र इतना करा फिर कुछ दिन इतना मंत्र करा, फिर कुछ इतना मंत्र करा उससे ध्यान नहीं लगेगा , ध्यान का व्यहवारिक अर्थ अपने समझ लिया कि हमे आनंद आना चहिये, शांति रहना चाइए ।

Dhyan लगाने की ब्रम्हास्त्र विधि

आपको ध्यान के समय कुछ ईच्छा नहीं रखना है , काफी सारा नही करना है ,आपको कसमे-वादे सिर्फ एक जगह निभानी है, व्यहवारिकता में जैसे करते है यानि जिससे विवाह करा उसी से जीवन भर निभाते हो।

सबसे पहले आप फैसला करो कौन से गुरु से आप प्रभावित हो और उन्ही का फोटो ले के चलो ना, १० लोंगो का फोटो ले के । कुछ लोग तो राम जी का भी फ़ोटो रख रहे है कृष्ण जी का भी रख रहे है बहुत सारा रख रहे है , हो सकता है आपकी श्रद्धा हो, ठेस पहुंचाना मेरा मकसद नही है मेरा उद्देश्य है आपको वो “ब्रह्मास्त्र” बताना जिससे आपका ध्यान लग जाये, मन शांत हो जाये । ५ मंत्र इनका किया, १० बार इनका किया ये नही चलेगा।

जैसे ही आप का मंत्र का अधिष्ठाता आने वाला रहेगा आपने किसी दूसरे को पुकार लिया ।
अरे १० लोंगो को बुला लिया तो कौन आएगा वहाँ पर? किसी एक को बुलाते तो आ भी जाता ।

कुछ लोंगो को तो मानना है कि बगैर शादी के भी चलेगा काम, एक पर्याप्त था एक ही का फोटो ले के चलना था ।आप को शादी एक से ही करना था, शादी मतलब “दीक्षा”, शादी मतलब अध्यात्म जगत में “दीक्षा”, अगर आपने “दीक्षा” किसी एक से लिया है ।

तरीका

1. एक तरीका ये भी है ना कुछ ना करो विधि या

2. दूसरा तरीका ये भी है “गुरु-गम्य” कर ले विधि,

Dhyan Nahi Lagta To “ब्रह्मास्त्र” क्या है आप अपने ही गुरु का या किसी एक का करो ना की जिसे आप मानते हो,

१० लोंगो को बुलाओगे तो कैसे होगा ? “वेवफाई” है ना ?

“दीक्षा” किसी और से लिया फ़ोटो किसी और का रखा, मेरे साथ भी ऐसा करते है लोग फ़ोन मेरे को करते है फिर कही और करते है, ५ दिन इसका यूट्यूब, ५ दिन उसका यूट्यूब । अरे भाई एक जगह टीक जाओ ना ।

5 दिन ये मंत्र किया, 5 दिन वो मंत्र करा फिर मन मे तो बखेड़े होंगे ना । किसी एक मार्ग पे चलते तो मंजिल भी मिलती ।

किसी ने तो “टोने-टोटके” वाला कर दिया, फिर कही और पहुंच गया, फिर योग में आ गया फिर भक्ति में ।

‘हे गुरु जी तुम्ही जय हो’ । अरे तो पहले क्यो नही बोले तुम्ही जय हो। तो ये तो ‘वेवफाई’ हुई ना, “दीक्षा” कहीं और ली फ़ोटो किसी और का ले के चल रहा है तो कैसे ध्यान लगे ?

तो क्या करना है

एक तरफा रहे आप, एक जगह रहे

जैसे:- कुछ लोग तो कभी इस मंत्र को जाप किया, कभी उसके पास गया। एक तरफा तो है ही नही तो कैसे उनके मन मे बखेड़ा खड़ा ना हो, उस गुरु जी ने ये कहा था, इस गुरु जी ने ये कहा था।

यही “ब्रह्मास्त्र” है जो मै आपको बता रहा हूँ एक ही मंत्र जप करें, एक ही गुरू के बने रहे , एक ही पर श्रद्धा करनी है, मान लेना है, श्रद्धा और विश्वास ही तो करना है, आसान तरीका में “गुरु-गम्य” विधि है जिसमे मै ये बता रहा हूँ या वो एक कठिन तरीका है किसी पर आप भरोसा, विश्वास नही कर रहे हो तो कोई आपको नही मिल रहा है तो खुद को आना चाहिए फिर, अब खुद को आता नही, दूसरे को मानते नही ये तो गलत बात हुई ना।

तो एक ही गुरू के बनें और वेवफाई नही होनी चाहिए और अपने आप आता है तो ठीक है नही तो भी “आदि शंकराचार्य” जी ने एक श्लोक क्यो रचा है “ध्यान मूलम गुरु मूर्ति” आपने सुना होगा, ध्यान का मूल क्या है गुरु की मूर्ति,

1. आप अपने गुरु की मूर्ति का ध्यान करे,

2. फिर भी मन ना लगे उसका अगला पद भी तो है “पूजा मूलम गुरु पदम”

3. पूजा का मूल क्या है गुरु का चरण, गुरु की सेवा, गुरु पे भक्ति, गुरु पर श्रद्धा।

इतने बड़े संत है जिन्होंने “१०८ उपनिषद” रचा और इतनी कम उम्र में इतने ज्ञानी थे उन्होंने “अद्धेतवाद का सिद्धान्त” दिया तो कुछ तो बात होगी, उनके श्लोक में आता है ” पूजा मूलम गुरु पदम” गुरु का पद ही पूजा का मूल है अगर अपने आप मे समर्थ है तो ठीक है नही तो आसान तरीका तो गुरु सेवा ही बता रहे है “आदि शंकराचार्य” श्लोक है उसमें वो बताते है “मंत्र मूलम गुरु वाक्यम” गुरु का वाक्य ही मंत्र है अगर आपका ध्यान नही लग रहा ।

आप ४ फ़ोटो, अलग – अलग मंत्र, करते है तो ध्यान लगना सम्भव नही है इतने बड़े संत लिख रखे है, इतने बड़े संत का वचन है।

मंत्र का मूल्य कौन सा है:-

गुरु का वाक्य है मंत्र का मूल है। नही तो 7 करोड़ मंत्र है कौन सा जाप करोगें कुछ दिन ये करा, कुछ दिन वो करा।
देख लो मास्टर चाबी यही है “ब्रह्मास्त्र” यही है ध्यान लगाने का,

ध्यान मना आनंद पाने का है । भौतिक जगत का मूल ही क्या है किसी ने धन कमाया है यानि रुपया, रुपया तो खयेगा नही कुछ वस्तु खरीदेगा या कही घूमने जयेगा जब तक वस्तु होगा तब तक खुशी होगी ।

आनंद की परिभाषा :-

आनंद नही होगा, खुशी और आनंद में अंतर है। खुश होना, दुख होना, आनंद तो वो वस्तु है ना, जो बगैर वस्तु के ही आपको प्राप्त हो जाये जैसे:- आपने पढ़ाई को पास कर लिया, आपने लक्ष्य को पूरा कर लिया, आपने ग्रेजुएट पूरा किया फर्स्ट डिवीज़न में, मेरिट आ गयी, अब क्या हुआ आनंद आया या खुशी आयी ? खुशी आयी, आप होते हो खुश, आप प्रसन्न हो गए पर आनंद नही हुआ । आनंद में तो वस्तु होती ही नही है बगैर वस्तु के आप आनंदित रहोगे

जैसे:- बच्चा सोते – सोते भी आनंद मे रहता है उस समय दूध तो पिता नही फिर भी वह मुस्कुराता रहता है , आनंद में रहता है ,उसकी वस्तु कुछ भी नही है ।

आनंद का अर्थ अलग है उसमें वस्तु विशेष नही, खुशी तो मिटने वाली है पल भर की है, आपको समझना है यह “दर्शन शास्त्र” है “मनोविज्ञान” है “आध्यात्मिक जगत” है और अगर आपने आप आता है तो किसी से कुछ पूछने की जरूरत ही नही।

Dhyan Nhi Lagta To क्या करना चाहिए 1.एक ही मंत्र का जाप सदा करें 2. गुरू की बताये मंत्र का जाप करें 3. गुरू मूर्ति का ध्यान करें 4.मंत्र और गुरू में श्रद्धा, विश्वास रखें। Dhyan Nhi Lagta To अपने गुरू का सानीध्य प्राप्त करें।

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क्रिया योग ,ध्यान योग ,मंत्र साधना शिविर में शामिल होना चाहते है तो संपर्क करे वाट्स अप नं 7898733596 साधना विषय :- 1.क्रीया योग की उस गुप्त साधना का अभ्यास जिनका, वीडियो या लेख में बताना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है। २. ध्यान की खाश तकनीक। ३. मंत्र योग की खाश विधि। ४. समाधी की गुप्त रहस्य। ५. कुंडलिनी जागरण की गुप्त और विशेष टेक्निक। 6. आर्थिक और आध्यात्मिक विकास के लिये विशेष साधना विधि नोट :- Lockdown के बाद साधना शिविर में शामिल होकर आध्यात्मिक विकास करें । यदि आप का भाग्य में गुरु क्रपा नहीं है तो आप अभागा हैं। और गुरु दीक्षा लेकर ईस दिन गुरू मंत्र का विशेष अनुष्ठान कीया तो अभागा भी महा पुण्य वान, माहा भाग्यशाली बन जायेगा सिर्फ श्रद्धा विश्वास रखता हो !