October 30, 2020
  • October 30, 2020
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Kriya Yog Samadhi

By on January 19, 2019 8

Kriya Yog Samadhi

आध्यात्मिक उन्नति के लिये में आपका स्वागत है ।

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Kriya yog

ईस लेख में आपको ऐसी गोपनीय क्रिया बताने वाला हूँ जिसे आप अति दुर्लभ kriya yog, samadhi कहते है जो कि आपने अब तक सुना नही था, जाना नही था !

जब भी आप योग के बारे में सुनते है तो हाथ-पैर को तोड़ते- मोड़ते व्यायाम तक ही आप जानते थे। मै आपको हिमालय की कन्दराओं में रहने वाले साधु-संतो है उनसे जाना था, उस विधि को Kriya Yog, samadhi आपको बताने वाला हूँ, जिसे हर मानव को, हर साधक को जानना चाहिये ।

Kriya Yog, samadhi लाभ :-

इस विधि को करने से आप सांस लेने की क्रिया को जान पायंगे,

इस क kriya yog को करने से आप जान पायंगे की वास्तव में हमारे अंदर जो शक्ति छिपी है उसे जागृत कैसे करते है,

जब तक विचारो में नियंत्रण नही होगा तब तक एक सामान्य मनुष्य की तरह ही जीवन-यापन करते रहेंगे,

जिस दुनिया वालो के लिए, व्यापार और समाज के लिए बुद्धि के द्वारा विज्ञान की प्रगति हो सकती है परंतु बुद्धि पक्ष अपने आप मे सम्पूर्ण मानवता का विकास नही है, यह एक छोटा सा भाग है क्योंकि बुद्धि केवल जीवन को सुख प्रदान कर सकती है, विज्ञान को उत्पन्न कर सकती है इसके माध्यम से हवाई जहाज, टीवी, कंप्यूटर और भी इलेक्ट्रॉनिक या ऐसे कोई साधन उत्पन्न कर सकती है जिससे हमें खुशी हो ।

पूर्ण सुख, पूर्ण सुविधाएं, पूर्ण आनंद की प्राप्ति ये तो सिर्फ श्रद्धा के बल पर ही और इस Kriya Yog के माध्यम से ही आप प्राप्त कर सकते हैं ना को आप हवाई जहाज से, ना ही टीवी और कंप्यूटर से ।

विज्ञान से पूर्ण आनंद की प्राप्ति हो ये संभव नही है चूंकि आपने भी देखा होगा जिनके पास रुपये है, जिनके पास ये साधन है वो पूरी तरह से आनंदित नही है !

जबकि झोला लेकर या सिर्फ अपने लंगोट में बैठे हुए संत को देखा होगा कि वो ऐसी कोई kriya yog जनता है, ऐसी कोई युक्ति जनता है जिसके माध्यम से पूर्ण आनंदित है, वो युक्ति मै आपको बताने वाला हूँ लेकिन पूरा पढें तभी आप इस बात को समझ पायंगे।

Kriya Yog Samadhi

आवश्यक शर्त :-

वास्तव में Kriya yog क्या है ? इस युक्ति को समझने से पहले आपको समझना होगा अपने मानव मस्तिष्क को, और आपको करना होगा इस क्रिया पर श्रद्धा , पूर्ण तरह से श्रद्धा , पूरी तरह से विश्वास, मन की तृप्ति तभी आप आध्यात्मिक चिंतन के द्वारा समाधि प्राप्त कर पायंगे , आध्यात्मिक विचार केवल श्रद्धा के द्वारा ही प्राप्त हो सकती है इसका मतलब श्रद्धा को आपको बढ़ाने के लिए गुरु, इष्ट या ध्यान और धारणा की जरूरत पड़ेगी ।

Kriya Yog, Samadhi :-

एक विचार उठा और दूसरी उठने वाली है इसके बीच मे टिके रहना या विचार शून्य मष्तिक बनाना, इसे Kriya yog, Samadhi कह सकते है ।

सिर्फ आसान व्यायाम तो प्रायमरी प्रक्रिया थी ।

Samadhi :-

Kriya yog करने के बाद अक्रीय हो जाना, विचार शुन्य हो जाना Smadhi है।

क्रिया-योग , समाधि में आपको अंदर उतारने के लिए, अपने मष्तिक को नियंत्रित करना होगा जबकि संसार के सबसे जटिल , सबसे कठिन मशीन मानव-मस्तिष्क है और ये मानव-मस्तिष्क हर समय गतिशील रहता है, विचारो से, भावनाओ से, ऐसा कोई समय नही है ।प्यारे ! की दिमाग मे हमारे कोई विचार ना उठे ।

हर क्षण विचार उठते रहता है और दिमाग बोझिल हो जाता है जिससे हम अपनी शक्ति को जागृत नहीं कर पाते। जिससे हम पूरी तरह से समझ नही पाते अपने अंदर आनंद की अनुभूति को और उस “क्रिया-योग” को या फिर उस परमात्मा की अनुभूति को । विज्ञान के अनुसार मष्तिक एक सेकंड में हज़ारों विचारो को जन्म देता है और छोड़ देता है ।

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Kriya yog vidhi :-

अब सवाल ये है कि , मस्तिष्क पर इतना बोझ है उसे हम कैसे नियंत्रित करे ? इन हज़ारो विचारो को कैसे रोके और कैसे उस शक्ति को जागृत करे जो हर किसी के अंदर मौजूद है ,जीसे कुंडलीनी कहते हैं ।

एक सामान्य मनुष्य को सांस लेने की क्रिया का ज्ञान नही है, वह ऊपरी सांस लेते है । वह जो सांस लेता है वह केवल गले तक ही जा पाती है जबकि “पूरक” का तातपर्य है हम जो सांस ले वह “नाभि” तक पहुंचे यानि आपको “पूरक” करना है, जिससे “नाभि” स्पन्दित हो ।

उदाहरण :-

यदि दो महीने के बच्चे को नींद में सांस लेते हुये देखा होगा तो आपको लगेगा वह जो सांस ले रहा है उससे उसकी “नाभि” बराबर धड़कती है परंतु मनुष्य यदि नींद लेता है तो “नाभि” में कोई स्पंदन नही होता । इसका मतलब है हम सांस लेने की प्रक्रिया को भूल चुके है वह जो बच्चा दो-तीन महीने के बीच का है जब सांस लेता है गले तक नही बल्कि गहरा सांस लेता है लेकिन हम जो सांस लेते है यानि हम जैसे-जैसे बड़े होते गए हमने अपनी चर्बी से या अन्य जो पदार्थ जो हमे नही खा कर नस नाडी को ब्लाक कर लिया।

और हम आत्मा से दूर होते गये। क्रिया योग को भूल गए और हमारे ये सातो “केंद्र” सुप्त अवस्था मे आ गये ।

ईसे हम जागृत कर सकते है ।

1. आपको उल्टे नांक से सांस लेना है ,

2. सीधे नाक से जोरो से बाहर फेंकनी है ऐसा आप लगातार करते रहे और दस “10 ” बार करने के बाद

3. 11 बार आप सांस ले तो उसे आप गहरी सांस लेने के बाद अंदर रोके रखे । या बाहर ही रोके रखे यानी बाह्य कुंभक करें !

यानि 10 “भस्रिका” करे उसके बाद “कुम्भक” करे फिर “रेचक” करे !

4. अब दूसरे नाक से हवा ले कर 10 बार जोरो से फेकें और 11 को रोके रखें।

यानि ये सारी क्रिया पहले बांये नथुने से करे फिर उसके बाद उसे दाहिने नथुने से करें।

ईस क्रीया को उल्टे से 5और सीधे नाक से 5 बार करने के बाद हवा अंदर ही रोक लो थक जाने पर हवा बाहर छोड़ कर बाहर ही रोक लो, “यानि केवली कुंभक करें ” ! ईस क्रीया को 7 बार करें और अब आप शांति से बैठ जाये “सांभवी मुद्रा”।

सांभवी मुद्रा :-

यानि सांभवी मुद्रा में ध्यान करें। बस आपको सोचना कुछ नही है आपके मन मे जो प्रश्न उठ रहे है या जो भी बातें उठ रही है उसे दृष्टा बन कर देखते रहना है ।

संकल्प साधना ईसे भी पढें https://mantragyan.com/sankalp-sadhna-vidhi-2/

Samadhi :-

प्यारे ! क्रिया योगी जब इन क्रियाओं को करने के बाद शांत मन बैठता है तो उसे

Samadhi 1 Step

पहली अवस्था” प्राप्त होने लगता है, जिसमे साधक व्यक्ति को ज्ञात होता है वह स्त्री है, पुरुष है, कौंन सी जाती धर्म का हैं, मुस्लिम है, ईसाई है, सिख है, उन्हें अपने बारे में पूरी बात पता होती है लेकिन उसे यह भी ज्ञात हो जाता है कि जो आनंद की स्थिति है वह सिर्फ और सिर्फ ध्यान समाधि से ही प्राप्त हो सकती है, इस प्रक्रिया से ही प्राप्त हो सकती है लेकिन

Samadhi 2 Step

प्यारे ! मैं आपको इस “क्रिया-योग” की “दूसरी अवस्था” बता रहा हूँ जब आप इन क्रियाओं को करने के बाद शांत मन बैठता है। तो जब व्यक्ति इस क्रियाओं को करता है तो उसकी धारणा मजबूत होने लगती है यह “दूसरी अवस्था” है इसमें उसे आनंद की अनुभूति हो सकती है तो सिर्फ और सिर्फ इन क्रियाओं से यह पक्की हो जाती है और इन क्रियाओं को वो चाह कर भी छोड़ नही पाता, उसे अपने पौरुष पर या अपनी जाति धर्म पर घमण्ड नही होगा। वह इन क्रियाओं की “दूसरी अवस्था” प्राप्त कर लेगा।

Samadhi 3 Step

लेकिन “तीसरी अवस्था” होती है इस अवस्था मे वह किसी भी वस्तु अथवा घटना देखने का भाव बदल जाता है !

जैसे:-

सिनेमा में कोई फ़िल्म चल रही हो जिसमें कोई हेरोइन डांस करें, नाचे तो भी उसे सिर्फ मनोरंजन के तौर पर देखता है, वैसे ही जगत को वह सिर्फ भाव – अभाव से परे हो कर देखता है उन्हें सिर्फ फ़िल्म की तरह ही नज़र आता है ।

Samadhi 4 Step

लेकिन “चौथी अवस्था” जिसकी होती है साधकों इस अवस्था को आप अटल कह सकते है यानि इसमे कोई ओर-छोर नही होता। इसमे साधक का परिवेश उसका जीवन संकुचित नही रहता, वह पूरे ब्रह्मांड को पूरे विश्व को अपने स्तर पर सोचने लगता है वो हिन्दू-मुस्लिम, भाव, प्रान्त, देश, काल इनके लिए मायने नही रखता वो सबको अपना मानता है और पूरी तरह से व्यापक हो जाता है।

Samadhi 5 Step

“पांचवी अवस्था” जो आती है उस अवस्था को आप प्राण अवस्था कह सकते है इस अवस्था मे साधक का मन जो है भ्रांति रहित रहता है यानि किसी भी चीज़ो से वह परे हो जाता है वह रोटी भी खाएगा तो भी उसे वही आनंद आएगा जो उसे मिठाई में आता है । पूरी तरह से वह इस बात को जान जाता है की जगत में जो भी चल रहा है वो चल-चित्र मात्र है “प्राणमय कोष” में पहुंचने की स्थिति वह पूर्ण कर लेता है यानि संत और डाकू में भी उन्हें एक ही नज़र आता है इसी अवस्था मे वह अपने इष्ट का साक्षात्कार पाता है और कही भी कोई भी चींजों को बैठ कर वह देख लेता है । पूरे विश्व मे घटने वाली घटनाओं को यहाँ तक कि पिछले जीवन को अगले जीवन को, किसी का भी भूत-भविष्य जान जाता है वो । यह “पांचवी अवस्था” है !

Samadhi 6 step

“पांचवी अवस्था” है जिसमे देख तो लेता है परंतु हस्तक्षेप करने की स्थिति नही रहती, उसमे ईश्वर की बनाई कृति जान जाता है पर विरोध नही कर सकता । किसी के जीवन में जो गलत हो रहा है उसे वो रोक नही सकता, पर इस “छठी अवस्था” मे आकर प्रकरिति में घटने वाली घटना को रोक सकता है । पर कोई चमत्कार नहीं करता। उनकी ईच्छा सम हो चुका होता है। वह इस अवस्था मे पूर्ण गुरु होने की पात्रता रखता है “बाल्मीकि” जैसे डाकू को भी वो इस अवस्था मे आने के बाद संत बना सकता है ।

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Samadhi 7 step

“सांतवी अवस्था” बता रहा हूँ , यह साधकों यह ध्यान की सर्वोच्च अवस्था है जिसमे साधक सिर्फ दृष्टा रहता है, साक्षी रहता है, वह हस्तक्षेप करना चाहे तो भी नही करता, उसे इच्छा ही नही उठती वो पूर्ण आनंद स्वरूप रहता है जिसे वाणी से नही कहा जा सकता, पर उनकी दृष्टि जहाँ भी जयेगी वह “बाल्मीकि” जैसे डाकू को भी संत बना सकता है साधको ,पूर्ण विश्व, ब्रह्मांड को वह सब कुछ देखता है पर हस्तक्षेप नही करता, ” छठी अवस्था” मे वह हस्तक्षेप कर सकता है लेकिन “सांतवी अवस्था” में पूरे विश्व को देखने के बाद भी , हर घटनाओ को जानने के बाद भी हस्तक्षेप नही करेगा क्योंकि पूरी तरह जान गया कि यह “माया-मात्र” है वह पूर्ण आनंद की स्थिति में रहता है।

Focus Word :-

Kriya yog, Samadhi प्राप्त साधक का मंत्र, गुरू, ईष्ट तिनो की त्रिपुटी शांत हो जाता है। अनके द्रस्टि में, दर्शन, द्रिश्य, द्रस्टा तिनो शांत हो जाता है।,वह खा कर भी नहीं खाया, कुछ कर के भी अकर्ता रहता है यानी सारे अहंकार शांत हो जाता है, खुदा से जुदा नहीं रहता। मैं परमात्मा से प्राथना करता हूँ आप भी kriya yog, Samadhi प्राप्त करे।

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क्रिया योग ,ध्यान योग ,मंत्र साधना शिविर में शामिल होना चाहते है तो संपर्क करे वाट्स अप नं 7898733596 साधना विषय :- 1.क्रीया योग की उस गुप्त साधना का अभ्यास जिनका, वीडियो या लेख में बताना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है। २. ध्यान की खाश तकनीक। ३. मंत्र योग की खाश विधि। ४. समाधी की गुप्त रहस्य। ५. कुंडलिनी जागरण की गुप्त और विशेष टेक्निक। 6. आर्थिक और आध्यात्मिक विकास के लिये विशेष साधना विधि नोट :- Lockdown के बाद साधना शिविर में शामिल होकर आध्यात्मिक विकास करें । यदि आप का भाग्य में गुरु क्रपा नहीं है तो आप अभागा हैं। और गुरु दीक्षा लेकर ईस दिन गुरू मंत्र का विशेष अनुष्ठान कीया तो अभागा भी महा पुण्य वान, माहा भाग्यशाली बन जायेगा सिर्फ श्रद्धा विश्वास रखता हो !