October 22, 2020
  • October 22, 2020

meditation kashe kare,

By on November 24, 2018 0

meditation kashe kare

meditation ka matlab:-

विचार मय meditation कैसे करें

जैसे कमरे में रखी हुई घडे का आकाश याने “घडे की अंदर की पोल ” कमरे की अंदर की अकाश से भिन्न नही है। और कमरे का आकाश उस महान विस्तृत आकाश से भिन्न नहीं है। कमरे और घडे की उपाधी से ही घटाकाश, मठाकाश भेद से छोटे बडे बहुत से आकाश प्रतीत होता है, वस्तुतः सभी को अपने ही अंदर अवकाश देने वाला एक ही महान आकाश सर्वत्र परिपूर्ण है। घडे में जो दिखाई देता हूआ आकाश है अपने घटाकाश नाम को त्याग दे और महान आकाश को अपना स्वरूप माने तो उन्हें पता चलेगा की सब कुछ उन्हीं मे कल्पित है।

भावार्थ यह की जीव अपने क्षुद्र अहंकार यानी जीव अभिमान को त्याग दे तो अभी के अभी ब्यापक रूप ब्रम्ह को जान ले ,

और यह जगत उन्हीं में कल्पित है, सबके अंदर बाहर केवल वही भरा है। अंदर बाहर ही नहीं, घडे का निर्माण जीस उपादान कारण से हुआ है, वह उपादान कारण भी मूल मे वस्तुतः वही है। उसके सीवा और कुछ है ही नही। वैसे ही एक ही चैतन्य आत्मा सर्वत्र परिपूर्ण है। उपाधी भेद से ही यह अभिन्नता प्रतीत होती है। साधको को चाहिए की ईस प्रकार विचार करके वह व्यष्टि शरीर में से आत्म रूप मै को निकाल कर चिन्मय समष्टिरूप प्रमात्मा में स्थित हो जाय और फीर उसके सम बुद्धि रूप नेत्रो से समस्त विश्व को अपनी शरीर सहित उसी में कल्पित देखे, और यह भी देखें की उसमे जो कुछ भी क्रीया हो रही है, सब प्रमात्मा के अंदर प्रमात्मा के हि संकल्प से हो रहा है।

सबका नीमीत और उपादान कारण केवल प्रमात्मा ही है। वही स्वरूप है और मै उससे अभिन्न हूँ।

असल में जड परिणामी, शून्य, विकारी, सीमित और अनित्य आकाश के साथ चेतन, सदा एकरस, सच्चिदा नंद घन, नीर्वीकार, असीम और नित्य प्रमात्मा की तुलना ही नहीं हो सकता। यह द्रिष्टांत तो केवल आंशिक रूप से समझने के लिये ही है।

यह ध्यान व्यवहार के समय भी करा जा सकता है।

How to meditate the idea of God: –

Like the sky in the room of the clock, “inside the pole” inside the room is no different than inside the room. And the sky in the room is not different from that great legendary sky. The room and the thickness of the clay, the difference between the difference of light, appears to be the smallest sky, virtually all the same great sky, which is the perfect leisure person, is perfect everywhere. The sky which is visible in the cave should be discarded its name, and if the great heavens are to be seen, they will know that everything is imagined in them.

If the creature renounces his own petty ego, that is, the pride of the universe, then know the Brahmachar just yet.

And this world is enlightened in them, only the person is filled out inside everyone. Not only inside, but the formation of the jade is due to the cause of the product, it is virtually the same in the original reason. Its seva and nothing else. Similarly, the same Caitanya Spirit is perfect everywhere. It appears to be integral to the degree of difference. By considering this kind of thinking, the seeker should remove the self from the human body and be placed in the ecstatic temporal form and he should see the entire universe as imagined in his own body, including his own body, and also see. Everything that is being done in it, is being done through all sermons of truth.

Everything is neutral and the cause of reason is only the soul. That is the same format and I am integral to him.

Actually there can not be comparison of heavy resultant, zero, vikari, limited and eternal sky with animate, always echoes, Sachchida nanda cube, non-negative, infinite and evergreen. This distraction is only for partial understanding.

This meditation can also be done at the time of practice.

YouTub :- YouTube.com/mantragyan

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