October 30, 2020
  • October 30, 2020

Ashnashth dhyan Vidhi

By on January 9, 2019 0

Asnashth dhyan

Ashnashth dhyan

Ashnashth dhyan

Asnashth dhyan क्या है ? :-

आसन का अर्थ है हमारे शरीर की स्थिति और ध्यान का मतलब आत्मा में विश्राम करना, Asnashth dhyan का मतलब आत्मा नंद मे आराम करना ।

Asnashth dhyan व्यक्ति सहज ही चिदात्‍म सरोवर में आनंदित हो जाता है।
यह रहस्य है, और समझ में आ जाये तो बड़ा क्रांतिकारी है । समझना सरल भी है , और अपनी अहंकार में फसे के लिए भयंकर कठिन भी है। Asnashth dhyan हुआ व्यक्ति चिदात्म सरोवर में आनंदित हो जाता है, डूब जाता है।

जापान में झेन फकीरों की परम्परा है। उनसे तुम पूछो कि ध्यान के लिए क्या करें तो वे कहते हैं कि कुछ न करो, बस बैठ जाओ। ध्यान रखना, जब वे कहते हैं कि कुछ न करो तो इसका मतलब कुछ ना करो का मतलब गहरा है : – कुछ भी न करना, बस बैठ जाना। बस इतना ही करना कि बैठ गये और कुछ भी मत करना ! क्योंकि तुमने कुछ किया कि मन आया। बात सरल लगती है, पर बड़ी कठिन है। यही तो मुसीबत है कि बैठना मुश्‍किल है। आंख बंद की, काम शुरू हुआ, दौड़ शुरू हुई। शरीर बैठा हुआ दिखायी पड़ता है पर मन जाग रहा है ,कुछ कीया हुआ की याद कुछ करने की ईच्छा मन में चलते रहता है ।

Asnashth dhyan Vidhi :-

अगर तुम सिर्फ बैठ जाओ और कुछ भी न करो, तो ध्यान…। अगर तुम आसनस्थ हो जाओ, जस्ट सिटिंग, बस बैठे हैं अपनी आत्मा में , न राम—नाम का जप चल रहा है, न कृष्ण की याद और न ही कीसी देवी देवता को रीझाने का विचार चल रही है ।कुछ भी नहीं कर रहे हैं, न कोई विचार की तरंग है, क्योंकि वह भी कृत्य कर्म है। अगर तुम कुछ भी न करो, विचार को रोकने की कोशिश भी नहीं चल रही हो । क्योंकि वह भी कृत्य है, वह भी दूसरा विचार है। न तुम परमात्मा का स्मरण कर रहे हो, न संसार का । क्योंकि वे सब विचार हैं । न तुम भीतर दोहरा रहे हो कि ‘मैं आत्मा हूं, ‘अहं ब्रह्मास्मि’, ‘मैं ब्रह्म हूं, यह सब बकवास है । इसके दोहराने से कुछ भी न होगा, ये सब विचार हैं । तुम कुछ भी न कर रहे होओ । बस तुम बैठ गये, जैसे तुम एक चट्टान हो, एक पुतले की तरह, जिसके भीतर कुछ भी नहीं हो रहा, बाहर कुछ भी नहीं हो रहा ।

इस दशा का नाम Asnashth dhyan है। जापान में इस अवस्था को झाझेन कहते है बस, सिर्फ बैठ जाना। और, झेन फकीर इस विधि का उपयोग करते हैं। कभी – कभी बीस साल लग जाते हैं, तीस साल लग जाते हैं, तब कहीं आदमी इस अवस्था में पहुंच पाता है कि सिर्फ बैठा हुआ है ।

मानस ध्यान विधि ईसे भी पढ़े 👉 https://mantragyan.com/dhyan-smadhi/what-is-manash-dhyan-and-best-method/

हम जो भी पुजा या पाठ के नाम पर कर्म करते हैं यह सब आत्म विश्रांति नहीं करने की कोशिश जब छूट जायेगी तब हम आराम याने Asnashth dhyan कर पायेंगे और ज्ञानयोग होगा समाधि होगी। क्रीया योग भी हमारे करने की आदत को छुडाने की एक जबरदस्त प्रक्रिया है ।Asnashth dhyan पाने के लिये पहले क्रीया योग करें फीर अक्रीया हो जायें अर्थात Asnashth dhyan करें और जीस दिन ईस विधि में सफल हो जाते हो सब कुछ पा सकते हो। क्रीया योग साधना की जानकारी के लिये यूटूब पर देखें ।

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