October 23, 2020
  • October 23, 2020

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Welcome to mantragyan.com.

Dindyal Sadhu ji was born in Chhattisgarh, Balod district, in a decent farmer family, 9/2/1979.

The  grandfather of Dindyal Sadhu ji Param Pujya Shri Latkhor Sahu Ji was a famous farmer, and mother shreemati Kesher Bai was always engaged in devotion from childhood hearing about the devotion sidha of your mother develop great interest and can be possible to found God? , Big or fate? , Do the questions always do with yourself Seeing the photograph of the sadhu Mahatma, what are you doing with the eyes of raising the question of raising the question, he always raised the question in the mind ? In childhood,

the devotional scripture taught by mother had done full study of Shri Sukh Sagar, whose devotion became awakened and through the practice of Kumbak in the shastar (शास्त्र), the life of the supernatural, riddhi siddhi, spiritual devi know wisdom began to emerge in the heart . Since childhood there was a talented child but in the absence of the Master diverted towards silence , fast etc., and pursue spiritual journey through fasting of meditation and devotion. His father was a job and by looking at the rude behavior due to drinking alcohol with wrong unsocialiesd activity. Resentment towards the spiritual field started strengthening in the year 1999 leaved the birth place durg started living alone in his city. After leaved of home suffer money problem to search employment and work as a casual labour for many place in durg . Completed his graduate degree from durg college and represent the college in state leves for the curriculum and sports activits.

When Dindyal Sadhu ji was eligible for marriage devlop the detachment for all relation about parents , relative and social relation and attracted towards the spirituality and hebegan to grow in knowledge and seen from childhood, everything has changed in the world so far and had experienced deeper experience in spiritual practice; Were aware of the truth. And one day In 2008 leaved all relation, workll and going to fulfill the knowledge is going to have to walk in the hope that it is not necessary to know who I am. Why does it hurt? Why have you been born?

In the journey of the search till 2015 he met man holines men (संत ) and sadhus and lI’ve in many places under master such as Haridwar, kedar fadka, rishikesh , badrinath, vishv nath vally and keep pracrice of spirituality. After researching for more than 6 years,

he is devoting his time in the work of Yoga, worship, Kundalini Yoga, Gyan Yoga meditation,  and dedicated to social work and gain the deeper knowledge about wholley text yogvashisht ( योगवशिष्ठ ), maharamayan (महारामायण). They have been invited regularly to give satsang on Yoga as well as Ramayana and meditation along with Kriya Yoga.

Mantra Gyan – 2016 has been established to serve the people with the help of seekers, which is the divine science given by our through

MantraGyan.com we are offering various services to people of Indian and foreign countries . Knowledge of Kriya Yoga, meditation, samadhi, and knowledge gyan is to be accessible to all masses free of charge.

Counseling the physical, divine and spiritual problems associated with the life of your life is given free of charge so that you can be free from the problem by doing meditation.

Dindayal Sadhu ji is a seeker of a new generation while serving people through yoga and knowledge. Sadhu ji is known as great knowledge and know action of yoga. He got experienced the self, which is known to everything that has been experienced, is a seeker. And started to guide people at a very young age. Apart from this, he does not do anything else and holds Brahmacharya.

In his spiritual journey, today, he has the seekers of all walks of life. He also offers personalized spiritual advice to Businessmen corporates and politician.

mantragyan.com में आपका स्वागत है।

श्री दीनदयाल साधु जी का जन्म छत्तीसगढ़, बालोद जिला में एक सभ्य किसान परिवार में 9/ 2/ 1979 था हुआ ।

दीनदयाल साधु जी दादा परम पूज्य श्री लतखोर साहू जी धर्म परायन एक प्रसिद्घ किसान थे, और माता जी केशर बाई सदा भक्ति में व्यस्त रहती थी । बचपन से, अपने माता जी की भक्ति की बात सुनकर बड़ी दिलचस्पी पैदा हुई और भगवान को पाया जा सकता है क्या ? , कर्म बडा या भाग्य ? , ईस प्रकार सवाल सदा अपने आप से कीया करते । साधु महात्माओ की फोटो देखकर सवाल उठना की आंखे बंद कर क्या कर रहें हैं , ईस तरह की सवाल सदा मन में उठा करता था ।

बचपन में ही मा के द्वारा पढें जाने वाली भक्ति शास्त्र श्री सुख सागर का पुरा अध्ययन कर चुका था , जीससे भक्ति जाग्रत हुई और ईस शास्त्र में बताये कुंभक का अभ्यास से प्राण सुक्ष्म होने से अलौकिक रीद्धी सीद्धी, अध्यात्मिक दीव्य ज्ञान ज्ञान ह्रदय में उभरने लगे।

बचपन से ही प्रतिभा संपन्न बालक थे लेकिन प्रतक्ष गुरू के अभाव में मौन व्रत , उपवास , ध्यान , भक्ति के द्वारा अध्यात्मिक यात्रा का प्रयास रत रहते थे । उनके पिता नौकरी करने वाले थे और गलत संगती से शराब पीने के कारण असभ्य व्यवहार को देख कर संसार के प्रति वैराग्य मजबूत होने लगा, और जीवन में कुछ करने की चाह में सन 1999 में अपनी जन्म स्थान छोड़ कर दुर्ग शहर में अकेला निवास करने लगे। पेट पालने के लिये मजदूरी और स्व रोजगार करते और अपनी आगे की स्कूल पढाई भी जारी रखा और सांईस कालेज दुर्ग से 2001 में बी ए स्नातक की उपाधि प्राप्त की । खेल में प्रतिभा होने के कारण अनेको बार राष्ट्रीय खेल में भी राज्य और यूनिवर्सिटी का प्रतिनिधित्व की ।

दीनदयाल साधु जी जब विवाह के योग्य हुये तो साधक होनें के कारण वैराग्य उत्पादन हुआ और उनके मन में ज्ञान प्राप्ति की लालसा बढ़ने लगी चूंकि बचपन से अब तक संसार में सब कुछ बदलते देखा और अध्यात्मिक अभ्यास में काफी गहरा अनुभव कर चुके थे, संसार की सच्चाई से अवगत हो चुके थे।

और एक दिन :-
सन 2008 को रीस्ते नाते, सारे कार्य छोड़ कर ज्ञान को पूर्ण करने की आश में चल पढे कंहा जाना है नही पता बस बस ज्ञान चाहिए,  मै कौन हूँ ? दुख क्यों होता है ? जन्म क्यों हूआ है?

और ईस खोज की यात्रा में 2015 तक अनेको साधु महात्मा से मीले कई आश्रमों में रहे काफी अनुष्ठान किये , उतराखंड में हरीद्वार , रिषिकेश और हिमालय का केदार फडका में वर्ष – वर्ष भर रहे , हिमालय का बदरी नांथ, विश्वनाथ घाटी जैसे निर्जन और दुर्गम स्थानो में भी वर्षो साधना करते रहे ।

6 से अधिक वर्षों तक शोध करने के बाद, वह क्रीया योग , पूजा पाठ , ध्यान , कुंडलीनी योग , ज्ञान योग और मन की साधना , सामाजिक कार्य में अपना समय समर्पित कर रहे हैं और भारत में

और भक्ति , क्रीया योग ,ज्ञान योग के हलकों में सम्मानित व्यक्तित्व के रूप में माना जाता है।

उन्हें क्रीया योग के साथ-साथ योगवशिष्ट माहा रामायन और ध्यान पर सत्संग देने के लिए नियमित रूप से आमंत्रित किया गया है।

YouTube.com/mantrayan यूटूब चैनल  – 2017  में साधको की मदद के लिये,और वेबसाइट mantragyan.com से लोगों की सेवा के लिए स्थापित किया गया है, जो हमारे संतों द्वारा दी गई दिव्य विज्ञान है।

mantragyan.com के माध्यम से हम भारतीय और विदेशों के लोगों के लिए विभिन्न सेवाएं दे रहे हैं। क्रीया योग की संही जानकारी ,ध्यान ,समाधि र ज्ञानयोग का जानकारी सभी जन समान्य तक फ्री में पहूँचाना है ।

आप के जीवन से जूडे भौतिक ,दैवीय और अध्यात्मिक समस्या का सलाह निःशुल्क  में दीया जाता है जीससे आप साधना कर समस्या से मुक्त हो सकें ।

दीनदयाल साधु जी क्रीया योग और ज्ञान के माध्यम से लोगों की सेवा करते हुए एक नई पीढ़ी के साधक हैं। साधु जी को महान ज्ञान और क्रीया योग के जानकार के रूप में जाना जाता है। वह आत्म का अनुभव कीया हूआ, जीससे सब कुछ जाना जाता है को अनुभव कीया हूआ साधक है ।

और बहुत कम उम्र में लोगों को मार्गदर्शन करना शुरू कर दिया। इसके अलावा वह कुछ भी अन्य कार्य नहीं करता और ब्रह्मचर्य धारण कर रखें है।

अपनी आध्यात्मिक यात्रा में, आज, उनके पास जीवन के सभी क्षेत्रों के साधक हैं। वह कॉर्पोरेट दुनिया से उद्योगपति, व्यापारियों और                अधिकारियों को व्यक्तिगत अध्यात्मिक सलाह भी देते हैं

क्रिया योग ,ध्यान योग ,मंत्र साधना शिविर में शामिल होना चाहते है तो संपर्क करे वाट्स अप नं 7898733596 साधना विषय :- 1.क्रीया योग की उस गुप्त साधना का अभ्यास जिनका, वीडियो या लेख में बताना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है। २. ध्यान की खाश तकनीक। ३. मंत्र योग की खाश विधि। ४. समाधी की गुप्त रहस्य। ५. कुंडलिनी जागरण की गुप्त और विशेष टेक्निक। 6. आर्थिक और आध्यात्मिक विकास के लिये विशेष साधना विधि नोट :- Lockdown के बाद साधना शिविर में शामिल होकर आध्यात्मिक विकास करें । यदि आप का भाग्य में गुरु क्रपा नहीं है तो आप अभागा हैं। और गुरु दीक्षा लेकर ईस दिन गुरू मंत्र का विशेष अनुष्ठान कीया तो अभागा भी महा पुण्य वान, माहा भाग्यशाली बन जायेगा सिर्फ श्रद्धा विश्वास रखता हो !