October 23, 2020
  • October 23, 2020

Kalsarp dosh Nivaran kase Kare

By on March 4, 2019 0

Kalsarp dosh Nivaran kase Kare

In this article में हम चर्चा करने वाले हैं Kalsarp dosh Nivaran kase Kare काफी साधक अपने जीवन में सफल नहीं हो पा रहे, because उनके unsuccess के पीछे उनके पिछले कर्मो के कारण Kalsarp dosh का होना है, and अगर Kalsarp dosh है , तो उसके Nivaran Kya ha.

Kalsarp dosh Nivaran करने के लिए लिए काफी सारी खर्च हो जाता है , तो हम ऐसे कुछ तरीका बताएंगे जिन्हें करने के बाद आप अपने जीवन में Kalsarp dosh से आसानी से मुक्ति पाई जा सकती है।

 

Siv Ratri

 

वैसे तो भगवान शिव का अभिषेक हमेशा करना चाहिए, लेकिन Siv Ratri (04 मार्च,सोमवार) का दिन कुछ खास है। यह दिन भगवान Sicv ji का विशेष रूप से प्रिय माना जाता है। कई ग्रंथों में भी इस बात का वर्णन मिलता है। भगवान Siv का अभिषेक करने पर उनकी कृपा हमेशा बनी रहती है And मनोकामना पूरी होती है। धर्म सिन्धू के दूसरे परिच्छेद के अनुसार,अगर किसी खास फल की इच्छा हो तो भगवान के विशेष Siv ling की पूजा करनी चाहिए।

 

Kalsarp dosh Nivaran kase Kare

 

Kalsarp

 

फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को mahasivratri का पर्व मनाया जाता है। इस बार ये पर्व 04 मार्च, सोमवार को है। Jyotis के अनुसार, जिन लोगों को Kalsarp dosh है, वे यदि इस दिन कुछ विशेष उपाए करें तो इस दोष से होने वाली परेशानियों से राहत मिल सकती है।

विशेष :-

अगर यह उपाय माहा शिव रात्रि को न कर सके हैं तो भी प्रतेक माह की शिव रात्रि को और सोमवार को कर सकते हो।

 

Kalsarp dosh Ka parakar :-

 

➡ Kalsarp dosh मुख्य रूप से 12 प्रकार का होता है,इसका निर्धारण जन्म कुंडली देखकर ही किनया जा सकता है। प्रत्येक Kalsarp dosh के निवारण के लिए अलग-अलग उपाए हैं। यदि आप जानते हैं कि आपकी कुंडली में कौन का Kalsarp dosh है तो उसके अनुसार आप Mahasivratri पर उपाए कर सकते हैं।

 

Kalsarp dosh के प्रकार व उनके उपाए इस प्रकार हैं:-

 

kalsarp dosh nivaran

kalsarp dosh nivaran

🐍 1.अनन्त Kalsarp dosh

 

-अनन्त Kalsarp dosh होने पर नागपंचमी पर एकमुखी,आठमुखी अथवा नौ मुखी रुद्राक्ष धारण करें।

-यदि इस दोष के कारण स्वास्थ्य ठीक नहीं रहता है,तो महाशिवरात्रि पर रांगे (एक धातु) से बना सिक्का नदी में प्रवाहित करें।

 

🐍 2.कुलिक Kalsarp dosh

 

-कुलिक नामक कालसर्प दोष होने पर दो रंग वाला कंबल अथवा गर्म वस्त्र दान करें।

-चांदी की ठोस गोली बनवाकर उसकी पूजा करें और उसे अपने पास रखें।

 

🐍 3. वासुकि Kalsarp dosh

 

– वासुकि कालसर्प दोष होने पर रात को सोते समय सिरहाने पर थोड़ा बाजरा रखें और सुबह उठकर उसे पक्षियों को खिला दें।

– महाशिवरात्रि पर लाल धागे में तीन, आठ या नौ मुखी रुद्राक्ष धारण करें।

 

🐍 4. शंखपाल Kalsarp dosh

 

शंखपाल कालसर्प दोष के निवारण के लिए 400 ग्राम साबुत बादाम बहते जल में प्रवाहित करें।
– महाशिवरात्रि पर शिवलिंग का दूध से अभिषेक ।

 

🐍 5. पद्म Kalsarp dosh

 

– पद्म कालसर्प दोष होने पर महाशिवरात्रि से प्रारंभ करते हुए 40 दिनों तक रोज सरस्वती चालीसा का पाठ करें।

जरूरतमंदों को पीले वस्त्र का दान करें और तुलसी का पौधा लगाएं।

 

🐍 6. महापद्म Kalsarp dosh

 

– महापद्म कालसर्प दोष के निदान के लिए हनुमान मंदिर में जाकर सुंदरकांड का पाठ करें।

– महाशिवरात्रि पर गरीब, असहायों को भोजन करवाकर दान-दक्षिणा दें।

 

🐍 7. तक्षक Kalsarp dosh

 

– तक्षक कालसर्प योग के निवारण के लिए 11 नारियल बहते हुए जल में प्रवाहित करें।

– सफेद कपड़े और चावल का दान करें।

 

🐍 8. कर्कोटक Kalsarp dosh

 

– कर्कोटक कालसर्प योग होने पर बटुकभैरव के मंदिर में जाकर उन्हें दही-गुड़ का भोग लगाएं और पूजा करें।

महाशिवरात्रि पर शीशे के आठ टुकड़े नदी में प्रवाहित करें।

 

🐍 9. शंखचूड़ Kalsarp dosh

 

– शंखचूड़ नामक कालसर्प दोष की शांति के लिए महाशिवरात्रि की रात सोने से पहले सिरहाने के पास जौ रखें और उसे अगले दिन पक्षियों को खिला दें।
– पांचमुखी, आठमुखी या नौ मुखी रुद्राक्ष धारण करें।

 

🐍 10. घातक Kalsarp dosh

 

– घातक कालसर्प के निवारण के लिए पीतल के बर्तन में गंगाजल भरकर अपने पूजा स्थल पर रखें।

चार मुखी, आठमुखी और नौ मुखी रुद्राक्ष हरे रंग के धागे में धारण करें।

 

🐍 11. विषधर Kalsarp dosh

 

– विषधर कालसर्प के निदान के लिए परिवार के सदस्यों की संख्या के बराबर नारियल लेकर एक-एक नारियल पर उनका हाथ लगवाकर बहते हुए जल में प्रवाहित करें।

– महाशिवरात्रि पर भगवान शिव के मंदिर में जाकर यथाशक्ति दान-दक्षिणा दें।

 

🐍 12. शेषनाग Kalsarp dosh

 

– शेषनाग कालसर्प दोष होने पर महाशिवरात्रि की पूर्व रात्रि को लाल कपड़े में थोड़े से बताशे व सफेद फूल बांधकर सिरहाने रखें और उसे अगले दिन सुबह उन्हें नदी में प्रवाहित कर दें।

महाशिवरात्रि पर गरीबों को दूध व अन्य सफेद वस्तुओं का दान करें।

 

Maha Siv Ratrli

 

➡ 04 मार्च 2019 सोमवार को Maha Siv Ratrli हैं ।

 

अर्ध रात्रि की पूजा के लिये स्कन्दपुराण में लिखा है कि फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी को ‘निशिभ्रमन्ति भूतानि शक्तयः शूलभृद यतः । अतस्तस्यां चतुर्दश्यां सत्यां तत्पूजनं भवेत् ॥’ अर्थात् रात्रि के समय भूत, प्रेत, पिशाच, शक्तियाँ और स्वयं शिवजी भ्रमण करते हैं; अतः उस समय इनका पूजन करने से मनुष्य के पाप दूर हो जाते हैं । शिवपुराण में आया है “कालो निशीथो वै प्रोक्तोमध्ययामद्वयं निशि ॥ शिवपूजा विशेषेण तत्काले ऽभीष्टसिद्धिदा ॥ एवं ज्ञात्वा नरः कुर्वन्यथोक्तफलभाग्भवेत्” अर्थात रात के चार प्रहरों में से जो बीच के दो प्रहर हैं, उन्हें निशीधकाल कहा गया हैं | विशेषत: उसी कालमें की हुई भगवान शिव की पूजा अभीष्ट फल को देनेवाली होती है – ऐसा जानकर कर्म करनेवाला मनुष्य यथोक्त फलका भागी होता है

 

 

चतुर्दशी तिथि के स्वामी शिव हैं। अत: ज्योतिष शास्त्रों में इसे परम कल्याणकारी कहा गया है। वैसे तो शिवरात्रि हर महीने में आती है। परंतु फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी को महाशिवरात्रि कहा गया है। शिव रहस्य में कहा गया है ।

शिवपुराण में ईशान संहिता के अनुसार “फाल्गुनकृष्णचतुर्दश्यामादिदेवो महानिशि। शिवलिंगतयोद्भूत: कोटिसूर्यसमप्रभ:॥”  अर्थात फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी की रात्रि में आदिदेव भगवान शिव करोडों सूर्यों के समान प्रभाव वाले लिंग रूप में प्रकट हुए इसलिए इसे महाशिवरात्रि मानते हैं।

 

और पढें

 

शिवपुराण में विद्येश्वर संहिता के अनुसार शिवरात्रि के दिन ब्रह्मा जी तथा विष्णु जी ने अन्यान्य दिव्य उपहारों द्वारा सबसे पहले शिव पूजन किया था जिससे प्रसन्न होकर महेश्वर ने कहा था की “आजका दिन एक महान दिन है | इसमें तुम्हारे द्वारा जो आज मेरी पूजा हुई है, इससे मैं तुम लोगोंपर बहुत प्रसन्न हूँ | इसीकारण यह दिन परम पवित्र और महान – से – महान होगा | आज की यह तिथि ‘महाशिवरात्रि’ के नामसे विख्यात होकर मेरे लिये परम प्रिय होगी |

 

Kalsarp dosh Nivaran kash :-

 

( जो साधक अपने गुरू मंत्र का जाप नित्य करते हैं उन्हें कोई भी समस्या दुखी नहीं कर सकते )

 

इसके समय में जो मेरे लिंग (निष्कल – अंग – आकृति से रहित निराकार स्वरूप के प्रतीक ) वेर (सकल – साकाररूप के प्रतीक विग्रह) की पूजा करेगा, वह पुरुष जगत की सृष्टि और पालन आदि कार्य भी कर सकता हैं |

 

जो महाशिवरात्रि को दिन-रात निराहार एवं जितेन्द्रिय रहकर अपनी शक्ति के अनुसार निश्चलभाव से मेरी यथोचित पूजा करेगा, उसको मिलनेवाले फल का वर्णन सुनो | एक वर्ष तक निरंतर मेरी पूजा करनेपर जो फल मिलता हैं, वह सारा केवल महाशिवरात्रि को मेरा पूजन करने से मनुष्य तत्काल प्राप्त कर लेता हैं | जैसे पूर्ण चंद्रमा का उदय समुद्र की वृद्धि का अवसर हैं, उसी प्रकार यह महा शिव रात्रि तिथि मेरे धर्म की वृद्धि का समय हैं | इस तिथि मे मेरी स्थापना आदि का मंगलमय उत्सव होना चाहिये |

 

Kalsarp dosh Nivaran kase Kare

 

तिथितत्त्व के अनुसार शिव को प्रसन्न करने के लिए महाशिवरात्रि पर उपवास की प्रधानता तथा प्रमुखता है क्योंकि भगवान् शंकर ने खुद कहा है – “न स्नानेन न वस्त्रेण न धूपेन न चार्चया। तुष्यामि न तथा पुष्पैर्यथा तत्रोपवासतः।।” ‘मैं उस तिथि पर न तो स्नान, न वस्त्रों, न धूप, न पूजा, न पुष्पों से उतना प्रसन्न होता हूँ, जितना उपवास से।’

 

स्कंदपुराण में लिखा है “सागरो यदि शुष्येत क्षीयेत हिमवानपि। मेरुमन्दरशैलाश्च रीशैलो विन्ध्य एव च॥ चलन्त्येते कदाचिद्वै निश्चलं हि शिवव्रतम्।” अर्थात् ‘चाहे सागर सूख जाये, हिमालय भी क्षय को प्राप्त हो जाये, मन्दर, विन्ध्यादि पर्वत भी विचलित हो जाये, पर शिव-व्रत कभी निष्फल नहीं हो सकता।’ इसका फल अवश्य मिलता है।

 

वस्तु दोष निवारण ईसे भी पढें https://mantragyan.com/vashtu-tips/vastu-dosh-nivaran-ke-saral-upay-and-mining-of-vashtu-dosh/

 

‘स्कंदपुराण’ में आता है “परात्परं नास्ति शिवरात्रि परात्परम् | न पूजयति भक्तयेशं रूद्रं त्रिभुवनेश्वरम् | जन्तुर्जन्मसहस्रेषु भ्रमते नात्र संशयः||” ‘शिवरात्रि व्रत परात्पर (सर्वश्रेष्ठ) है, इससे बढ़कर श्रेष्ठ कुछ नहीं है | जो जीव इस रात्रि में त्रिभुवनपति भगवान महादेव की भक्तिपूर्वक पूजा नहीं करता, वह अवश्य सहस्रों वर्षों तक जन्म-चक्रों में घूमता रहता है |’

 

ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार एकादशी को अन्न खाने से पाप लगता है और शिवरात्रि, रामनवमी तथा जन्माष्टमी के दिन अन्न खाने से दुगना पाप लगता है। अतः महाशिवरात्रि का व्रत अनिवार्य है।

 

Focus word :-

 

Kalsarp dosh Nivaran kase Kare Article में बताए गए नियम के अनुसार उपाय करें, And अपनी Kalsarp dosh दूर करें And अपने जीवन में चमत्कार महसूस करें सफलता पायें। Kalsarp dosh Nivaran kase Kare article दुखी परेशान लोगों में शेयर करे , and लोगों का दुख दूर करने में सहयोग कर पुन्य लाभ जरूर कमायें।

 

क्रिया योग ,ध्यान योग ,मंत्र साधना शिविर में शामिल होना चाहते है तो संपर्क करे वाट्स अप नं 7898733596 साधना विषय :- 1.क्रीया योग की उस गुप्त साधना का अभ्यास जिनका, वीडियो या लेख में बताना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है। २. ध्यान की खाश तकनीक। ३. मंत्र योग की खाश विधि। ४. समाधी की गुप्त रहस्य। ५. कुंडलिनी जागरण की गुप्त और विशेष टेक्निक। 6. आर्थिक और आध्यात्मिक विकास के लिये विशेष साधना विधि नोट :- Lockdown के बाद साधना शिविर में शामिल होकर आध्यात्मिक विकास करें । यदि आप का भाग्य में गुरु क्रपा नहीं है तो आप अभागा हैं। और गुरु दीक्षा लेकर ईस दिन गुरू मंत्र का विशेष अनुष्ठान कीया तो अभागा भी महा पुण्य वान, माहा भाग्यशाली बन जायेगा सिर्फ श्रद्धा विश्वास रखता हो !