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सोमवती अमावस्या महत्व

By on February 3, 2019 1

सोमवती अमावस्या महत्व

ईस लेख में हम सोमवती अमावस्या महत्व पर प्रकाश डालेंगे। अमावस्या के दिन सोमवार का योग होने पर उस दिन देवताओं को भी दुर्लभ हो ऐसा पुण्यकाल होता है ,

Somvati Amavashiya Mahatv

Somvati Amavashiya Mahatv

क्योंकि गंगा, पुष्कर एवं दिव्य अंतरिक्ष और भूमि के जो सब तीर्थ हैं, वे ‘सोमवती (दर्श) अमावस्या के दिन जप, ध्यान, पूजन करने पर विशेष धर्मलाभ प्रदान करते हैं । इसीलिये सोमवती अमावस्या महत्व को समझने वाले साधक ईस दिन विशेष साधना संपन्न कर अपना जीवन धन्य करते हैं देखते हुए

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सोमवती अमावस्या महत्व

🌹सोमवती अमावस्या, रविवारी सप्तमी, मंगलवारी चतुर्थी, बुधवारी अष्टमी – ये चार तिथियाँ सूर्यग्रहण के बराबर कही गयी हैं ।

🌹इनमें किया गया स्नान, दान व श्राद्ध अक्षय होता है ।

🌹सोमवती अमावस्याः दरिद्रता निवारण

🌹इस दिन भी मौन रहकर स्नान करने से हजार गौदान का फल होता है।

🌹इस दिन पीपल और भगवान विष्णु का पूजन तथा उनकी 108 प्रदक्षिणा करने का विधान है। 108 में से 8 प्रदक्षिणा पीपल के वृक्ष को कच्चा सूत लपेटते हुए की जाती है। प्रदक्षिणा करते समय 108 फल पृथक रखे जाते हैं। बाद में वे भगवान का भजन करने वाले ब्राह्मणों या ब्राह्मणियों में वितरित कर दिये जाते हैं। ऐसा करने से संतान चिरंजीवी होती है।

🌹इस दिन तुलसी की 108 परिक्रमा करने से दरिद्रता मिटती है।

🌺ईस दिन अपने गुरू मंत्र का नित्य पाठ करे और कोई भी दिक्कत हो उन से निकलने की मानसिक प्राथना करें तो भी 10000गुणा लाभ होता है।

सोमवती अमावस्या महत्व समय :-

कल 4/2/2019 सोमवती अमावस्या है !

कल का दिन का जप 10000 गुना फल देता है रात्रि को जप करते करते ही सोना और कल सुबह उठकर थोड़ा शांत में जप में बैठना

सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण के समय जप से जितना फल होता है उतना ही सोमवती अमावस्या का फल होता है ।

कल सुबह जब करना बिस्तर पर बैठे बैठे भी करना ना करते समय भी करना अपने गुरू मंत्र जप के अर्थ में शांत होते जान ।

जैसे :- ब्रह्मांड नायक परमात्मा ओम शांति

ओम आनंद

श्वास अंदर गया बाहर आए

यानि, ” ऊँ

सोमवती अमावस्या महत्व 2

सोमवती अमावस्या महत्व 2

इस दिन किया हुआ धर्म अथवा अधर्म अक्षय होता है और सैकड़ों जन्मों तक इसका फल प्राप्त होता है।

🌷 सोमवारेऽप्यमावास्या आदित्याहे तु सप्तमी।

चतुर्थङ्गारवारे च अष्टमी च वृहस्पतौ॥

अत्र यत् क्रियते पापमथवा धर्मसञ्चयः।

षष्टि जन्मसहस्राणि प्रतिजन्म तदक्षयम्॥

परलोक महत्व :-

🙏🏻 अगर आप सौभाग्यशाली हैं और इस दिन गंगा स्नान के लिए जा रहे हैं तो तर्पण के अलावा भी बहुत कृत्य हैं। स्कंदपुराण में भगवान शिव का कथन है ।

🙏🏻 जो पितरों के उद्देश्य से भक्तिपूर्वक गुड़, घी और तिल के साथ मधुयुक्त खीर गंगा में डालते हैं, उसके पितर सौ वर्षों तक तृप्त बने रहते हैं और वे संतुष्ट होकर अपनी संतानों को नाना प्रकार की मनोवाञ्छित वस्तुएं प्रदान करते हैं।

🙏🏻 जो पितरों के उद्देश्य से गंगाजल के द्वारा शिवलिंग को स्नान कराते हैं, उनके पितर यदि भारी नरक में पड़े हों तो भी तृप्त हो जाते हैं।

🙏🏻 जो एक बार भी ताँबे के पात्र में रखे हुए अष्टद्रव्ययुक्त (जल, दूध, कुश का अग्रभाग, घी, मधु, गाय का दही, लाल कनेर तथा लाल चंदन) गंगाजल से भगवान सूर्य को अर्घ्य देते हैं, वे अपने पितरों के साथ सूर्यलोक में जाकर प्रतिष्ठित होते हैं।

🙏🏻 जो गंगा के तट पर एक बार भी पिण्डदान करता है, वह तिलमिश्रित जल के द्वारा अपने पितरों का भवसागर से उद्धार कर देता है।

🙏🏻 पिता/माता/गुरु/भाई/मित्र/रिश्तेदार किसी के भी कुल में कोई किसी भी तरह, किसी भी अवस्था में मरा हो (चाहे अग्नि से या विष से या आत्मदाह अथवा अन्य प्रकार से मृत्यु) आज सब पितरों का उद्धार संभव है।

🙏🏻 माघ कृष्ण पक्ष की अमावस्या युगादि तिथि है। अर्थात इस तिथि को चार युगों में से एक युग का आरम्भ हुआ था। स्कंदपुराण के अनुसार “माघे पञ्चदशी कृष्णा द्वापरादिः स्मृता बुधैः” द्वापर की आदि तिथि हैं जबकि कुछ विद्वान इसको कलियुग की प्रारम्भ तिथि मानते हैं। युगादि तिथियाँ बहुत ही शुभ होती हैं, इस दिन किया गया जप, तप, ध्यान, स्नान, दान, यज्ञ, हवन कई गुना फल देता है l प्रत्येक युग में सौ वर्षों तक दान करने से जो फल होता है, वह युगादि-काल में एक दिन के दान से प्राप्त हो जाता है ।

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कैसे मनायें :-

🙏🏻 इस दिन साधु, महात्मा तथा ब्राह्मणों के सेवन के लिए अग्नि प्रज्वलित करनी चाहिए तथा उन्हें रजाई, कम्बल आदि जाड़े के वस्त्र देने चाहिए। इस दिन गुड़ में काले तिल मिलाकर मोदक बनाने चाहिए तथा उन्हें लाल वस्त्र में बांधकर ब्राह्मणों को देना श्रेयस्कर है। इसी पुण्य पर्व पर विभिन्न प्रकार के नैवेद्य मिष्टान्नादि षट्रस व्यंजनों से ब्राह्मणों को भोजन कराकर उन्हें द्रव्य दक्षिणादि से संतुष्ट कर प्रणामादि कर सादर विदा करना चाहिए।

🙏🏻 गौशाला में गायों के निमित्त हरे चारे, खल, चोकर, भूसी, गुड़ आदि पदार्थों का दान देना चाहिए तथा गौ की चरण रज को मस्तक पर धारण कर उसे साष्टांग प्रणाम करना चाहिए।

🙏🏻 माघी अमावस्या को प्रात: स्नान के बाद ब्रह्मदेव और गायत्री का पूजन करें। गाय, स्वर्ण, छाता, वस्त्र, पलंग, दर्पण आदि का मंत्रोपचार के साथ ब्राह्मण को दान करें। पवित्र भाव से ब्राह्मण एवं परिजनों के साथ भोजन करें। इस दिन पीपल में आघ्र्य देकर परिक्रमा करें और दीप दान दें। इस दिन जिनके लिए व्रत करना संभव नहीं हो वह मीठा भोजन करें।

🙏🏻 मौनी अमावस्या के दिन भूखे प्राणियों को भोजन कराने का भी विशेष महत्व है। इस दिन सुबह स्नान आदि करने के बाद आटे की गोलियां बनाएं। गोलियां बनाते समय भगवान का नाम लेते रहें। इसके बाद समीप स्थित किसी तालाब या नदी में जाकर यह आटे की गोलियां मछलियों को खिला दें। इस उपाय से आपके जीवन की अनेक परेशानियों का अंत हो सकता है। अमावस्या के दिन चीटियों को शक्कर मिला हुआ आटा खिलाएं। ऐसा करने से आपके पाप कर्मों का क्षय होगा और पुण्य कर्म उदय होंगे। यही प्राप्त पुण्य कर्म आपकी जीवन में मनोकामना पूर्ति में सहायक होंगे।

➡ अर्थात माघ मास की अमावस्या को प्रयाग राज में तीन करोड़ दस हजार अन्य तीर्थों का समागम होता है। जो नियमपूर्वक उत्तम व्रत का पालन करते हुए माघ मास में प्रयाग में स्नान करता है, वह सब पापों से मुक्त होकर स्वर्ग में जाता है।

Focus Words

बहुत बड़ा भारी लाभ होगा सोमवती अमावस्या महत्व को अगर आप समझ कर साधना कर सकते हैं तो ।ईस दिन को सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण के तुल्य तिथियां मानी जाती है । सूर्य ग्रहण चंद्र ग्रहण में जो जाप किया जाता है सोमवती अमावस्या पुण्य प्रदान करते हैं और मंत्र की सिद्धि देने वाली होती है ।

ईस दिन का दान, सेवा, ध्यान 10000 गुणा फल देगा। तो आप आध्यात्मिक लाभ आत्मिक लाभ जरूर पायें ।सोमवती अमावस्या महत्व को समझे और लाभ उठायें।

मै परमात्मा से प्रार्थना करता हूँ आपका मन गुरू सेवा में सद कार्य में लगा रहे यह लेख साधको में सेयर करने की सेवा और पुन्य लाभ जरूर पायें।

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