October 30, 2020
  • October 30, 2020
क्रिया योग कुंडलिनी जागरण की श्रेष्ठ विधि 

Horoscope and method of awakening

By on November 19, 2018 0

Horoscope and method of awakening

Horoscope and method of awakening

Horoscope and method of awakening

ईस लेख में Horoscope and method of awakening करने की गुप्त क्रीया योग विधि की पुरी जानकारी पढ़ने को मीलेगा ! हमारे शरीर में 72201नश नाडिया है जिनका उपयोग न करने के कारण सुप्त हो गई है ईस केंद्र को Kundlini Ko Active कर अदभुत शक्ति पाया जा सकता है।

Horoscope and method of awakening ईस लेख में बताये अनुसार अपने गुरू मंत्र का जाप और गुरु के मार्ग दर्शन में अभ्यास करने से आसानी से अपने Kundlini ko active कर सकते हैं ।

Kundlini Kya ha

प्रतेक जीव में विद्यमान अध्यात्मिक केंद्र है, जिसे सिर्फ विवेकी मानव ही जगा सकता है ,ईसे जगाने का कई विधियां है जैसे

1.मंत्र जप

2. क्रीया योग

3.निष्काम सेवा

4.ध्यान

आदि

Horoscope and method awakening

👉1. मूलाधार चक्र :-

यह सूछ्म शरीर का पहला कुण्डली चक्र है। गुदा और लिंग के मध्य 4 पंखुरियों वाला यह “मूआधार चक्र” है। ज्यादा तर लोग यानि 99.9% लोगों की मन इसी चक्र पर अटकी उलझी रहती है और वे इसी चक्र, केन्द्र , में रहकर मरते ,जन्मते रहते हैं। जिनके जीवन में भोग, संभोग और निद्रा की महता है,और साधना कभी करा नहीं , उनकी ऊर्जा इसी चक्र के आसपास एकत्रित रहती है और जानवर की नाइ भोगो में पच मरते है ।

🌺मंत्र : “लं”🌺

👉कैसे जाग्रत करें :

मनुष्य तब तक पशुवत है,जानवर के सामान है , जब तक कि वह इस सुप्त kundlini chakr में जी रहा है.! इसीलिए भोग, निद्रा और संभोग पर नियंत्रण रखते हुए इस kundlini चक्र पर लगातार dhyan लगाने से यह चक्र जाग्रत ,active होने लगता है। इसको जाग्रत करने का दूसरा नियम है यम और नियम का पालन करते हुए साक्षी भाव, द्रष्टा भाव में रहना।

👉प्रभाव : –

इस kundlini चक्र के जाग्रत होने पर व्यक्ति के भीतर वीरता, निर्भीकता और आनंद का भाव जाग्रत हो जाता है, साधक का जीवन बदलने लगता है । साधक में सिद्धियां प्राप्त करने के लिए वीरता, निर्भीकता और जागरूकता का होना अति जरूरी है।

👉2. स्वाधिष्ठान चक्र :-

यह वह आध्यात्मिक चक्र लिंग मूल से 4 अंगुल ऊपर स्थित है, इनका 6 : पंखुरियां हैं। अगर साधक की ऊर्जा इस चक्र पर ही एकत्रित है, वह आपके जीवन में आमोद-प्रमोद, मनोरंजन, घूमना-फिरना और मौज-मस्ती, भोग करने की प्रधानता रहेगी। इसी सब भोग करते हुए ही आपका जीवन कब व्यतीत हो जाएगा आपको पता भी नहीं चलेगा और हाथ फिर भी खाली रह जाएंगे, पछतावे ही हाथ लगेगा ।

🌺मंत्र : “वं”🌺

👉कैसे जाग्रत करें : –

सभी के जीवन में मनोरंजन जरूरी है, लेकिन मनोरंजन की आदत नहीं,लत नहीं । मनोरंजन भी व्यक्ति की चेतना को बेहोशी में धकेलता है। फिल्म सच्ची नहीं होती, मात्र कल्पना है ,लेकिन उससे जुड़कर आप जो अनुभव करते हैं वह आपके बेहोश जीवन जीने का प्रमाण है, आप स्वप्न जगत को सच मान लिए है ।

कुंडली

कुंडली

Horoscope and method of awakening

👉प्रभाव : –

इस kundlini chakr जाग्रत होने पर क्रूरता, गर्व, आलस्य, प्रमाद, अवज्ञा, अविश्वास आदि दुर्गणों का नाश होना शुरू होता है। सिद्धियां प्राप्त करने के लिए जरूरी है कि उक्त सारे दुर्गुण समाप्त हो जाये , तभी सिद्धियां आपका द्वार खटखटाएंगी, आप के साथ होगी ।

👉3. मणिपुरक चक्र :-

नाभि के मूल में रक्त वर्ण,लाल रंग का यह चक्र शरीर के अंतर्गत “मणिपुर” नामक तीसरा kndlini चक्र है, जो 10 कमल पंखुरियों से युक्त है। जिस व्यक्ति की चेतना या ऊर्जा इस chakr में एकत्रित है उसे काम करने की धुन-सी रहती है। ऐसे साधक लोगों को कर्मयोगी कहते हैं। ये लोग दुनिया का हर कार्य करने के लिए तैयार रहते हैं, और जुटे रहते है ।

🌺मंत्र : “रं”🌺

👉कैसे जाग्रत करें:-

आपके कार्य को सकारात्मक बनाने के लिए इस चक्र पर ध्यान लगाए । पेट से श्वास लें और मंत्र जप करे ।

👉प्रभाव :-
इसके चक्र सक्रिय होने से तृष्णा, ईर्ष्या, चुगली, लज्जा, भय, घृणा, नफरत , मोह आदि कषाय-कल्मष दूर हो जाते हैं। यह kundli चक्र मूल रूप से आत्मशक्ति प्रदान करता है। सिद्धियां प्राप्त करने के लिए साधक को आत्मवान होना जरूरी है, और आत्मवान होने के लिए यह अनुभव करना जरूरी है कि आप शरीर नहीं, हाड़ मांश मात्र नहीं , आत्मा हैं। आत्मशक्ति, आत्मबल और आत्मसम्मान के आगे जीवन का कोई भी लक्ष्य,मंज़िल दुर्लभ नहीं।

👉4. अनाहत चक्र:-

हृदय स्थल में स्थित स्वर्णिम वर्ण का 12 दल कमल की पंखुड़ियों वाला १२ स्वर्णाक्षरों से सुशोभित चक्र ही “अनाहत चक्र” है। अगर आपकी ऊर्जा अनाहत में सक्रिय ,active है, तो आप एक सृजनशील व्यक्ति होंगेऔर प्रतिभा संपन्न होंगे । हर क्षण आप कुछ न कुछ नया रचने की सोचते ,और करते रहेंगे।

🌺मंत्र : “यं”🌺

👉कैसे जाग्रत करें :-

हृदय पर संयम करने और ध्यान लगाने से यह सुप्त चक्र जाग्रत होने लगता है। खासकर रात्रि को सोने से पूर्व इस चक्र पर ध्यान,समाधि लगाने से यह अभ्यास से जाग्रत होने लगता है और “सुषुम्ना” इस चक्र को भेदकर ऊपर उर्ध्व गमन करने लगती है।

👉प्रभाव : –

इस kundlini chakr सक्रिय होने पर लिप्सा, कपट, हिंसा, कुतर्क, चिंता, मोह, दंभ,मन शांत होता है , अविवेक और अहंकार समाप्त हो जाते हैं। इस चक्र के जाग्रत होने से व्यक्ति के भीतर प्रेम और,दया , संवेदना का जागरण होता है। इस कुंडलिनी चक्र के जाग्रत होने पर व्यक्ति के समय ज्ञान स्वत: ही प्रकट होने लगता है। व्यक्ति अत्यंत आत्मविश्वस्त, सुरक्षित, चारित्रिक , जिम्मेदार एवं भावनात्मक रूप से संतुलित साधक ,व्यक्तित्व बन जाता हैं। ऐसा साधक व्यक्ति अत्यंत हितैषी एवं बिना किसी स्वार्थ के मानवता प्रेमी एवं सर्वप्रिय बन जाता है, लोगो का हितैषी होता है।

👉5. विशुद्धि चक्र:-
कंठ में यानि 5 केंद्र में , सरस्वती का स्थान है, जहां “विशुद्ध चक्र” है और जो १६ पंखुरियों वाला है। सामान्य तौर पर यदि आपकी,साधक की ऊर्जा इस चक्र के आसपास एकत्रित है, तो आप अति शक्तिशाली यानि आपकी बाते सभी को लुभाएगी और मधुर भाषी होंगे।

🌺मंत्र -: “हं”🌺

👉कैसे जाग्रत करें : –
कंठ में संयम,ध्यान करने से यह चक्र एक्टिव होता है।

👉प्रभाव : –

इसके चक्र जाग्रत होने कर 16 कलाओं और 16 विभूतियों का ज्ञान हो जाता है। इसके जाग्रत होने से जहां भूख और प्यास को जीता जाता है , रोका जा सकता है वहीं मौसम के प्रभाव को भी सहा जा सकता है।

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👉6. आज्ञाचक्र :-

भ्रूमध्य thard eye (दोनों आंखों के बीच भृकुटी में) में “आज्ञा-चक्र” है। सामान्यतौर पर जिस व्यक्ति,साधक की ऊर्जा यहां ज्यादा सक्रिय है, तो ऐसा व्यक्ति बौद्धिक रूप से संपन्न, संवेदनशील और तेज दिमाग,कुशाग्र बुद्धि का बन जाता है लेकिन वह सब कुछ जानने के बावजूद मौन रहता है।इसे “बौद्धिक सिद्धि” कहते हैं।

🌺मंत्र : “ॐ”🌺

अधिक जानकारी के लिये हमारे यूटूब पर देखें।

कैसे जाग्रत करें :-

भृकुटी के मध्य, thard eye में सांभवी मुद्रा में ध्यान लगातेा है, हुए साक्षी भाव में रहने से यह कुंडलिनी चक्र जाग्रत होने लगता है।

👉प्रभाव : –
इस कुंडलिनी में अपार शक्तियां और सिद्धियां निवास करती हैं। इस “आज्ञा चक्र” thard eye का जागरण होने से ये सभी शक्तियां जाग पड़ती हैं, व्यक्ति एक सिद्धपुरुष बन जाता है, विवेक का उदय हो जाता है ।

👉7. सहस्रार चक्र :-

सिर के मध्य भाग में sahashtr chakr है ,यानि sentar में है। अर्थात जहां चोटी रखते हैं। यदिसाधक व्यक्ति यम, नियम, अष्टांग योग के साथ या ‘क्रिया योग अभ्यास का ,पालन करते हुए यहां तक पहुंच गया है तो वह ‘आनंदमय कोष ‘ “सूछ्म शरी”र में स्थित हो जाता है। ऐसे साधक ,व्यक्ति को संसार, संन्यास और सिद्धियों से कोई मतलब ,लेना- देना नहीं रहता है, वह दिखावा नहीं करता है आपने निज आनंद में सदा मस्त रहता है।

👉कुंडली कैसे जाग्रत करें :-

क्रीया योग करने के बाद सांभवी मुद्रा में ध्यान लगायें, आपने गुरु के सानिध्य में करे ज्यादा अच्छा होगा।

जो भी साधक साधना करना चाहते है वह “मूलाधार” चक्र से साधना सुरु कर “सहस्रार” चक्र तक पहुंचा जा सकते है। और लगातार ध्यान साधना ,सदमार्ग में चलते रहे और इससे यह ७ वा “चक्र” जाग्रत हो जाता है. साधक व्यक्ति परमहंस के पद को प्राप्त कर लेता है, निज आत्मा को जान लेता है ।

👉प्रभाव : –

शरीर संरचना में इस स्थान पर अनेक महत्वपूर्ण विद्युतीय ,शक्ति और जैवीय विद्युत का संग्रह है। यही “मोक्ष” का मार्ग है।

नोट सभी :-

केंद्र के अलग अलग मंत्र न जप कर गुरू मंत्र का ही पालन करने से सारे कार्य बन सकते हैं ।

साधना में सफलता नियम ईसे भी पढें https://mantragyan.com/sadhnaye/kishi-bhi-sadhna-me-success-kividhi-kya-ha-and-savdaniya/

क्रीया योग

क्रीया योग

👉क्रीया योग वीधी :-

कीसी भी आसन मे बैठ कर ,
(1) बाये नथूने से हवा ले और दाहीने से जोरो से छोडे ऐसा जल्दी -जल्दी{ fast} 10 बार करने के बाद 11 को सीने मे रोक ले यानी बाऐ हाथ से नाक को दबोच कर रखें और मंत्र जाप करें ।
लगभग 1माला मंत्र जाप हो जाऐगा ,अब थक जाने पर
धीरे धीरे दाहीने नथूने से छोडें (मंत्र जाप सतत जारी रहे , दाहीने हांथ से माला करते रहें)

(2) दाहीने से ले कर बाए से जोरो से छोडें ऐसा 10 बार{fast } करने के बाद 11 बार ले कर रोक लो यानी बाऐ हांथ से नाक को दबोच लो । मंत्र जाप सत्त जारी रहे 1 माला मंत्र जाप हो जायेगा थक जाने के बाद बाऐ नथूने से हवा धीरे धीरे छोडें ।

दोनो मीला कर एक प्रणायाम हुआ ऐसा 5 प्रणायाम रोज करने के बाद शांभवी मुद्रा यानी भीर्कूटी के मध्य कम से कम 15 मी्नट तक ध्यान लगाऐं ।

सांभवी मुद्रा की लाईव वीडियो युटुब पर देखें । YouTube.com/mantragyan

Focus word

Horoscope and method of awakening यह लेख में बताये विधि का पालन करने से आप अपना अध्यात्मिक केंद्र एक्टीव कर सकते हो अपने गुरू से प्रामर्श लेकर साधना जरूर करें और ,Horoscope and method of awakening से संबंधित कोई सवाल है तो कामेंट में पुछे, साधको में सेयर करने की पुन्य लाभ जरूर कमायें। मै परमात्मा से प्रार्थना करता हूँ आप का मन साधना मे लगे और अध्यात्मिक शक्ति प्राप्त करें।

क्रिया योग ,ध्यान योग ,मंत्र साधना शिविर में शामिल होना चाहते है तो संपर्क करे वाट्स अप नं 7898733596 साधना विषय :- 1.क्रीया योग की उस गुप्त साधना का अभ्यास जिनका, वीडियो या लेख में बताना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है। २. ध्यान की खाश तकनीक। ३. मंत्र योग की खाश विधि। ४. समाधी की गुप्त रहस्य। ५. कुंडलिनी जागरण की गुप्त और विशेष टेक्निक। 6. आर्थिक और आध्यात्मिक विकास के लिये विशेष साधना विधि नोट :- Lockdown के बाद साधना शिविर में शामिल होकर आध्यात्मिक विकास करें । यदि आप का भाग्य में गुरु क्रपा नहीं है तो आप अभागा हैं। और गुरु दीक्षा लेकर ईस दिन गुरू मंत्र का विशेष अनुष्ठान कीया तो अभागा भी महा पुण्य वान, माहा भाग्यशाली बन जायेगा सिर्फ श्रद्धा विश्वास रखता हो !