October 22, 2020
  • October 22, 2020

sankalp sadhna vidhi 2

By on January 14, 2019 8

sankalp sadhna vidhi 2

Sankalp sadhna

कैसे हैं जी आप ? में आशा करता हूं कि आप कुशल मंगल से व मज़े से होंगे।आज के लेख में मैं आपको बताने जा रहा हूं खास साधना sankalp sadhna vidhi 2 आपको साल से इंतजार था। क्योंकि इससे पहले मैंने आपको सत्य संकल्प साधना का sankalp sadhna vidhi 1 आपको बतलाया था। और कहा था कि आप इस साधना का अभ्यास कीजिए और भाग दो का इंतजार कीजिए।

चेतावनी : –

इस Sadhna का अभ्यास वो ही साधक करें जिन्होंने किर्या योग,ध्यान, प्राणायाम,त्रीबन्ध, शाम्भवी मुद्रा, आदी सीख लिया है और sankalp sadhna vidhi 1 Sadhna पूर्ण कर लिया है ।

विज्ञान अविष्कार पर गलत सोंच?

क्या आप जानते हैं कि दूनिया का सबसे बड़ा अविष्कार कोन सा है ?

1.आप सोच रहे होंगे कि सबसे बड़ा अविष्कार तो इंटरनेट है।

2. टी वी मोबाइल, बड़ा अविष्कार है।

3. पक्षी जिस तरह से आकाश में उड़ते हैं।हम भी उसी तरह हवाई जहाज से आकाश में उड़ते हैं तो हवाई जहाज सबसे बड़ा अविष्कार है। तीनों ही गलत है ।

बडी अविष्कार :-

हमारे पूर्वज मनो वैज्ञानिक विश्वामित्र नें अपने मानसिक संकल्प शक्ति से जीता – जागता गुग्ती पक्षी बनाया, नारियल का पेंड भी बनाया ,ज्वार, बाजरा इन्ही मनोवैज्ञानिक का अविष्कार है ।

आज का इंटरनेट,टी वी, मोबाइल, हवाई जहाज, जैसे अविष्कार ईस अविष्कार के सामने तुच्छ है ।

केवली कुंभक विधि ईसे भी पढ़े https://mantragyan.com/kewali-kumbak-law-complete-with-all-the-wishes/

संकल्प साधना :-

संकल्प की साधना , जिस आप पढ रहें हैं ,इसके अभ्यास करने से पहले आपको भाग एक पुर्ण करना होगा । वा मन को पुर्ण एकाग्र करना होगा। फिर आपको १००% सफलता मिलेगी ही। आपके सारे संकल्प फलीभूत होने लगेंगे।आपका जीवन पुरी तरह से बदल जाएगा। इससे आपका आर्थिक,बोद्धिक, आध्यात्मिक,भोतिक,हर तरह का विकास होगा।आपकी आत्मिक शक्ति बढ़ जायेगी।बस साधना को पूर्ण श्रद्धा विश्वास के साथ करें।

सायद आप अभी विश्वास नहीं करेंगे। किन्तु इस साधना को खुद करिए और चमत्कार देखिए।

संकल्प सिद्धांत

हमारे सोच सत्य कैसे होता है यानि चमत्कार होता कैसे है ?

उदाहरण

आप दो या तीन मित्र मिलकर एक व्यक्ति या बच्चै को बारि – बारी से बीमार होने की भावना देते हो तो वह व्यक्ति सच का बीमार हो जाता है। लेकिन यह भी हमारे संकल्प की द्रिढ़ता पर निर्भर है। उसी के बल पर लोग मारण मोहन, वशीकरण,उच्चाटन,पता नहीं क्या क्या करते रहते हैं।

यह सब वेसै ही होता है जैसे आप किसी बच्चा से कह देते हैं कि आज तुम बिमार लग रहें हों। दूसरा मित्र भी उसी बच्चा से कहता है, आज तुम कुछ ठीक नहीं लग रहें हों। तीसरे ने भी कह दिया कि तुम बीमार लग रहें हों। अब वह सोचने लगता है, की जब इतने बड़े बड़े लोग कह रहे हैं कि मैं बीमार लग रहा हूं। क्या मैं सच में बीमार तों नहीं हूं? और वह बीमार, कमजोर, महसूस करने लगेगा है । ठीक इसके विपरित अगर सभी उससे कहते हैं ।

तुम तो बहुत स्मार्ट व होशियार लग रहें हों। तो उसमें सकारात्मक परिवर्तन होने लगेंगे।

अभ्यास :-

संकल्प साधना के पहले भाग में बतलाया था कि किस तरह से कल्पना में आपको रस्सी पर चढ़ना है,।उसी में मैंने बतलाया था कि कैसे आपको पक्षी की तरह आकाश में उड़ने का अभ्यास करना है। अब उससे आगे का अभ्यास ।

साधना 1 :-

1. आप शांत किसी आसन पर बैठ जाईए, और आंखें बंद करके आज्ञा चक्र पर ध्यान लगाईये।

2. अब आप मन ही मन सोचिए कि आप के आसपास छ: दुश्मन खडे हैं

A. एक काला है क्रोध।

B. दूसरा है काम।

C. बिल्कुल सुंदर और कामुक तिरछी नैन से मार रही है याने “काम वासना “।

D. लोभ, सोने, चांदी रूपये, मान -सम्मान का लोभ

E. पांचवां है मोह जो बाल बच्चै लेकर खड़ा हैं और उसकी पत्नी भी है। वह बच्चै को गोद में लेकर खड़ी है।

F. ईर्ष्या व द्वैष।

ये सारे दुश्मन खडे हैं । अब आपको मानसिक रूप से तलवार लेकर इन दुश्मनों से लडना है। ओर हरा कर तलवार से सब को काट देना है ,यानि गुरू मंत्र से मार डाले किन्तु याद रहे कि मानसिक संकल्प इतना घनीभूत हो कि ये सब प्रत्यक्ष सा दिखाई दे।अब आप महसूस करेंगे कि कुछ ही दिनों के अभ्यास के बाद काम,क्रोध,लोभ,मोह,ईर्ष्या द्वेष आदि में आपको समता प्राप्त हो गई है। आपको इन पर विजय प्राप्त हो गईं हैं।

अभ्यास 2 :-

1. आप शांत किसी भी सहज आसन में बैठ जाईए। और ध्यान लगाईये और महसूस कीजिए कि आप शांत एक रमणीक स्थान पर गर्म आसन पर बैठै है। बड़ी ही शीतल मन्द मन्द हवा चल रही है। पैडो पर बैठे पक्षीयो का मधुर मधुर ध्वनि सुनाई दे रही है। सामने पास ही कल-कल करती पवित्र नदी बह रही है। आसपास पारिजात,चम्पा, चमेली,मोगरा, रातरानी सभी प्रकार के पेंड है जो रंग-बिरंगे फूलों से लदे हुए हैं। इनमें से हवा के झोंको के साथ बडी ही पवित्र खुशबू आ रही है।

संकल्प साधना

आह! आह! आह! कितना रमणीक, आनंदमय स्थान है। हल्की- हल्की हवा चल रही है।

आह! ”आनंद ही आनंद” कितना आनन्द आ रहा है

यह अभ्याश आपको रोज करना है।

गुरू क्यों जरूरी है पढें https://mantragyan.com/dhyan-smadhi-and-sadhna-me-success-ke-liye-jaruri-niyam/

अभ्यास तीन

आप को वैसे ही शांत ध्यानमग्न बैठे रहना है बस महसूस करना है। कि जब आप स्कुल में पढ़ते थे ,तब जिससे लिखते वो पेन मै ही हूं। शिक्षक भी मैं ही हूं।किताब भी मैं हूं। लिखने वाली कापी भी मैं ही हूं। सभी छात्र भी मैं ही हूं , सभी छात्राए भी मैं ही हूं।उदण्ड छात्र और होशियार छात्र भी मैं ही हूं। वह उदण्ड छात्र मेरी ही सत्ता से उदण्ड कर पाता है , और जो वह शांत छात्र है वह भी मेरी ही सत्ता से शांत हैं।

बस आराम से शांत बैठे रहिए, और महसूस कीजिए कि दिखाई देने वाला चांद भी मैं ही हूं। सूर्य भी मैं ही हूं। नदियां भी मैं ही हूं। तारे भी मैं ही हूं ।व्रक्ष भी मैं ही हूं । पशु – पक्षी भी मैं ही हूं। पृथ्वी भी मैं ही हूं। साधक व साध्य भी मैं ही हूं। गुरु का दिया मंत्र भी मैं ही हूं सब मै ही हूं ।

व्यापक होते जाईये और व्यापक । जो -जो आप को याद आता जाये महसूस कीजिए कि सब आप ही हैं। मैदान भी मैं ही हूं । हरी घास भी मैं ही हूं।हवा भी मैं ही हूं ।

ऐसा महसूस कीजिए और विशाल होते जाईये। और व्यापक। पूर्ण व्यापक।

संकल्प साधना 2

थोड़े दिनों के अभ्यास के बाद आप महसूस करेंगे कि आपका आत्मिक विकास हो रहा है। जो भी सोचोगे वह घटित होने लगेगा याने Sankalp sadhna vidhi में सफलता मिलने लगेगा । लेकिन यह तभी संभव है जब आप पुर्ण श्रद्धा विश्वास के साथ एकाग्रता से साधना करेंगे ,और अगर आप 7 दिन भी अभ्यास कर पाओ तो आपका जीवन बदल जायेगी, भौतिक सुख सुविधा के साथ सांथ आत्मा नंद प्राप्त करने लगोगे। मैं प्रार्थना करता हूं की आप Sankalp sadhna vidhi में सफलता पायें

साधना जानकारी के लिये यूटूब पर देखें YouTube.com/mantragyan

ॐॐॐॐॐ

क्रिया योग ,ध्यान योग ,मंत्र साधना शिविर में शामिल होना चाहते है तो संपर्क करे वाट्स अप नं 7898733596 साधना विषय :- 1.क्रीया योग की उस गुप्त साधना का अभ्यास जिनका, वीडियो या लेख में बताना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है। २. ध्यान की खाश तकनीक। ३. मंत्र योग की खाश विधि। ४. समाधी की गुप्त रहस्य। ५. कुंडलिनी जागरण की गुप्त और विशेष टेक्निक। 6. आर्थिक और आध्यात्मिक विकास के लिये विशेष साधना विधि नोट :- Lockdown के बाद साधना शिविर में शामिल होकर आध्यात्मिक विकास करें । यदि आप का भाग्य में गुरु क्रपा नहीं है तो आप अभागा हैं। और गुरु दीक्षा लेकर ईस दिन गुरू मंत्र का विशेष अनुष्ठान कीया तो अभागा भी महा पुण्य वान, माहा भाग्यशाली बन जायेगा सिर्फ श्रद्धा विश्वास रखता हो !