October 23, 2020
  • October 23, 2020

Grah dosh santi mantra yantra

By on April 19, 2019 0

Grah dosh santi mantra yantra

इस Grah dosh santi mantra yantra लेख में नौ ग्रह की पीड़ा से मुक्ति के लिए मंत्र यंत्र बताए गए हैं ! जो भी साधक इस मंत्र यंत्र की अनुष्ठान पूजा पूजा विधि संपन्न करेंगे उनके जीवन में सारी समस्या खत्म होगा ही। Grah dosh santi mantra yantra के लीये श्रेष्ठ लेख है। बताये मंत्र का जाप करें और लाभ उठायें।

सूर्य ग्रह :-

सूर्य की पीड़ा से राजकोप एवं शरीर कष्ट , पित्त , ज्वर , मिर्गी , उदर विकार , नेत्र रोग तथा चर्मरोग होते हैं । सूर्य मंत्र का जाप संख्या 7 000 तथा विधिवत हवन एवं यंत्र धारण करने से रोग एवं कष्ट दूर होते हैं ।

सूर्य जाप मंत्र : –

ॐ आ कृष्णेन रजसा वर्तमानो निवेशयन्नमृतंमर्यं च ।

Grah dosh santi mantra yantra लेख में नौ ग्रह की पीड़ा से मुक्ति के लिए मंत्र यंत्र बताए गए हैं ! जो भी साधक इस मंत्र यंत्र की अनुष्ठान पूजा पूजा विधि संपन्न करेंगे उनके जीवन में सारी समस्या खत्म होगा ही। Grah dosh santi mantra yantra

sury yantra

हिरण्ययेन सविता रथेना देवो याति भुवनानि पश्यन् ।।

सूर्य गायत्री मंत्र :-

ॐ आदित्याय विद्महे प्रभाकराय धीमहि तन्नों सूर्य : प्रचोदयात् ।

सूर्य दान : –

माणिक्य , | चित्रम् । । घीमहि तन्नों गेंहू , गुड़ , सवत्सा गौ , लाल कपड़ा , नूतन गृह , रक्त चन्दन , स्वर्ण , ताम्रपत्र , केशर , वर्ण दक्षिणा ।

chandra yantra

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Grah dosh santi mantra yantra

चंद्र ग्रह :-

चन्द्र की पीड़ा से नाक के रोग , कफ की बीमारी , रक्त !विकार , अतिसार आदि रोग होते हैं । चन्द्र मंत्र का जाप संख्या 11,000 तथा विधिवत यंत्र धारण करने से रोग व कष्ट दूर होते हैं ।

चन्द्र जाप मंत्र: –

ॐ इमंदेवा असपल सुवध्वंमहते क्षत्राय , महते ज्यौठ्याय महते जानराज्यायेन्द्रस्येन्द्रियाय । इमममुष्य पुत्रमामुष्यै पुत्रमस्यै विश एष वोऽमी , राजा सोमोऽस्माकं ब्राह्मणाना राजा । ।

navgrah santi ke totke :-

चन्द्र गायत्री मंत्र :-

ॐ अमृतागाय विदमहे इन्द्रस्बेनि कलारुपाय धीमहि तन्नों सोमः प्रचोदयात् ।

चन्द्र दान :-

चॉवल , सफेद ,कपड़ा , सफेद चन्दन , फूल , शक्कर , चॉदी , घी , शंख , दही , मोती , कपूर , | शुक्रः । वंशपात्र गौ ।

Grah dosh Nivaran

mangal yantra

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मंगल ग्रह :-

मंगल की पीड़ा से संतान कष्ट , रक्त विकार आदि रोग होते हैं । मंगल मंत्र का जाप संख्या 10,000 तथा विधिवत यंत्र धारण करने से रोग व कष्ट दूर होते हैं ।

मंगल जाप मंत्र: –

ऊँ अग्निमुर्धा दिवः ककुत्पतिः । पृथिव्या अयम् । अपा रेता । सिजिन्वति । ।

मंगल गायत्री मंत्र :-

ॐ अंगारकाय विद्महे शक्तिहस्ताय धीमहि तन्नों भोमः प्रचोदयात् । मंगल दान – मुंगा , भूमि , मसूर की दाल , गहू , गुड़ , लाल चन्दन , लाल कपड़ा , लाल फूल , सोना ताँबा , केशर , कस्तुरी , रक्त वृषभ ।

budh yantra

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Grah dosh santi mantra

बुध ग्रह :-

बुध की पीड़ा से चर्म रोग , व्यापार हानि , मित्र विरोध आदि होते हैं । बुध मंत्र जाप का जाप संख्या 9000 तथा विधिवत यंत्र धारण करने से रोग एवं कष्ट दूर होते हैं ।

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बुध जाप मंत्र : –

ॐ उदबुध्यस्वाग्रे प्रति जागृहित्वामिष्टापूर्ते स सृ जेथामयंच । अस्मिन्त्सधस्थे अध्युत्तरस्मिन् विश्वेदेवा यजमानश्च सीदत

बुध गायत्री मंत्र :-

ॐ सोम्यरुपाय विदमहे वाणेशाय धीमहि तन्नों बुधः प्रचोदयात् ।

बुध दान : –

कॉसे का बर्तन , हरा कपड़ा , हाथी दाँत , घी , सोना , पन्ना , हरे फल , कपूर , गीता की पुस्तक , फल , षट्रस , भोजन ।

guru yantra

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गुरू ग्रह :-

गुरु को पीड़ा से पीला ज्वर , कफ सबंधी रोग , मस्तिक विकार आदि रोग होते हैं । गुरु मंत्र जाप संख्या 19000 तथा विधिवत यंत्र धारण करने से रोग एवं कष्ट दूर होते हैं ।

गुरु जाप मंत्र :-

५ बृहस्पते अतियदयों अहदयुमाद्विभाति कर्तुमज्जनेषु । यहीदयच्छवस तंप्रजात् तदस्मासु द्रविणधेहि चित्रम् । ।

Grah dosh santi mantra

गुरु गायत्री मंत्र :-

ऊँ अंगिरसाय विदमहे दण्डायुधाय धीमहि तन्नों जीवः प्रचोदयात ।

गुरु दान :-

चने की दाल , पीला कपड़ा , सोना , घी , पीले फल , केला , हल्दी की गांठ , पुस्तक , शहद , नमक , शक्कर , भूमि , घोड़ा , पुखराज ।

shukra yantra

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शुक्र ग्रह :-

शुक की पीड़ा से वार्य विकार , स्त्री सुख की हानि , धर्म की हानि आदि कष्ट एवं रोग होते हैं । शुक्र मंत्र का जाप संख्या 16000 तथा विधिवत यंत्र धारण करने से रोग एवं कष्ट दूर होते हैं ।

शुक्र जाप मंत्र: –

ॐ अन्नात्परिचुतो रसंब्रह्मणा यतिबत्क्षत्रपयः सोमप्रजापतिः । ऋतेन सत्यमिन्द्रियविपान शुक्रमन्धस इदस्बेन्द्रियमिदंपयोऽमृतमधु । ।

शुक गायत्री मंत्र: –

ॐ भृगुसुताय विदमहे दिव्यदेहाय धीमहि तन्नों शुक्लः प्रचोदयात् ।

शुक्र दान : –

सफेद चन्दन , चॉवल , सफेद चित्र , कपड़ा , सफेद फूल , चॉदी , हीरा , घी , सोना , दही , इत्र , शक्कर , गौ , भूमि , सफेद घोड़ा ।

shani yantra

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शनि ग्रह :-

शनि की पोड़ा से मान हानि , धन हानि अशांति आदि कष्ट का सामना करना पड़ता है । शनि मंत्र का जाप संख्या 23000 करने से कष्ट दूर होते हैं ।

शनि जाप मंत्र :-

ऊँ शनो देवीरभिष्टय आपो भवन्तु पीतये । । शंयोरभित्रवन्तु नः । ।

शनि गायत्री मंत्र :-

ॐ भगभवाय विद्महे मृत्युरुपाय धीमहि तन्नों शनिः प्रचोदयात । ।

शनि दान : –

नीलम , तिल , दही , उड़द , काला कपड़ा , कुलथीलोहा महिषो , कालो ग , काले फूल , जूता , कस्तुरी सोना ।

rahu yantra

rahu yantra

राहु की पीड़ा से मिर्गी अपतन्त्रक , वायु रोग , चेचक , रक्त विकार संबंधी रोग एवं कष्ट होते हैं । राहु मंत्र का जाप संख्या 18000 तथा विधिवत यंत्र धारण करने से रोग एवं कष्ट दूर होते हैं ।

राहु जाप मंत्र: –

ॐ कया नञ्चित्रं आ भवती सदावृधः सखा । कया शचिष्ठया वृता । ।

Grah dosh santi mantra

राहु गायत्री मंत्र: –

ॐ शिरोरुपाय विदमहे अमृतेशाय धीमहि तन्नों राह : प्रचोदयात् ।

राहु दान :- सप्तधान्य , उड़द , गोमेद , नीला कपड़ा , काला फूल , खडग , तिल , तेल , लोहा , सुपा , कम्वल , तेल , सहित ताम्र पात्र , घोड़ा

ketu yantra

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केतु ग्रह :-

केतु की पीड़ा से चेचक या चर्म रोग आदि होते है । केतु मंत्र जाप संख्या 17000। विधिवत धारण करने से रोग एवं कष्ट दूर होते हैं ।

केतु जाप मंत्र :-

ॐ केतुंकृण्वन्नकेतवे पेशो मर्या अपेक्षसे आप अपेशसे सभुषद्धिरजायथाः । ।

केतु गायत्री मंत्र: –

ॐ गदाहस्ताय दिमहे । अमृतेशाय धीमहि तन्नों केतुः प्रचोदयात् ।

केतु दान:-

कस्तूरी , उड़द , लहसुनियाँ , काला फूल , तिल , तेल , सोना , बकरा , शी , सप्तधन्य । ।

यंत्र धारण की विधि

जिस अनिष्ठ ग्रह की दशा चल रही हो उस ग्रह का उपरोक्त लिखित यंत्र भोज पत्र या सफेद कागज पर लाल चन्दन या लाल रंग से लिखकर ग्रह के गायत्री मंत्र का 108 बार जाप के उपरांत पंचोपचार से पूजा करें । यंत्र को ताबीज में रखकर गले या दाहिनी भुजा में ग्रहकृत दिन के अनुसार धारण करें ।

Focus word :-

Grah dosh santi mantra yantra ईस लेख में बताये विधि आपका जीवन बदलने में सहायक है। लेकिन सम्पूर्ण समस्या से निजात पाना चाहते हैं तो गुरू दीक्षा लेकर साधना करें।

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